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विकास: लटकी परियोजनाएं पूर्ण हो तो मिले लाभ

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कालीन नगरी में सालों से लटकी परियोजनाएं विकास में बाधक बन रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा समेत अन्य विभागों की कई परियोजनाएं एक से डेढ़ दशक बाद भी पूर्ण नहीं हो सकी। भ्रष्टाचार के कारण आरोपी अफसरों पर कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन आम जन से जुड़ी परियोजनाओं को अब तक गति नहीं मिल सकी। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाने पर सरकार का विशेष फोकस होता है। जनपद सृजन के बाद कालीन नगरी में ऐसा नहीं कि परियोजनाएं शुरू नहीं हुई। कई परियोजनाएं शुरू हुई, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण आगे नहीं बढ़ सकीं। इसमें शामिल है सरपतहां में निर्माणाधीन 100 शैय्या अस्पताल। जिला मुख्यालय के समीप 14 करोड़ की लागत से वर्ष 2009 में 100 शैया अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ। करीब 12 साल बाद लागत चार करोड़ बढ़कर 18 करोड़ पहुंच गई, लेकिन अस्पताल आमजन के लिए शुरू नहीं हो सका। 2016 में तत्कालीन डीएम अमृत त्रिपाठी ने जांच कराया तो करीब नौ करोड़ का घोटाला पकड़ में आया। दोषी परियोजना प्रबंधक समेत चार पर केस दर्ज हुआ। अफसर जेल भी गए। एसआईटी जांच भी बैठी, लेकिन अस्पताल पूर्ण नहीं हो सका। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अभोली, दुर्गागंज के निर्माण एजेंसी बगैर कार्य कराए ही 50 लाख डकार कर गायब हो गई। इसी तरह गरीब बच्चों के लिए वर्ष 2012-13 में वीरमपुर में आश्रम पद्धति स्कूल का निर्माण शुरू हुआ। करीब 13.50 करोड़ की लागत से बनने वाले स्कूल के निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था समाज कल्याण निगम ने सिडको को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी। वर्तमान में इसकी लागत 16 करोड़ से ऊपर पहुंच गई है। इस बीच अभियंताओं ने इसमें लाखों का घोटाला कर दिया। मामले की जांच हुई तो 25 लाख का घपला सामने आया। शासन के निर्देश पर तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सरोज श्रीवास्तव और अवर अभियंता एमपी सिंह के खिलाफ फरवरी में धोखाधड़ी, सरकारी धन का दुरुपयोग सहित कई धाराओं में सुरियावां थाने में मुकदमा दर्ज किया। पांच अगस्त 2021 को अवर अभियंता एमपी सिंह निवासी टकटकपुर थाना कैंट जनपद वाराणसी और अधीक्षण अभियंता सरोज श्रीवास्तव निवासी रामचंद्रपुर सलोरी थाना कर्नलगंज जनपद प्रयागराज को सुरियावां तिराहे से पुलिस ने गिरफ्तार किया। भदोही के मामदेवपुर में अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं के लिए पांच-पांच करोड़ की दो जीआईसी का निर्माण पांच साल पूर्व शुरू हुआ, लेकिन अब तक पूर्ण नहीं हो सका।
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