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10 बजे तक छाया रहा घना कोहरा

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ज्ञानपुर के पटेल नगर में घने कोहरे में लाइट जलाकर जाता ट्रक। - फोटो : BHADOHI
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ज्ञानपुर। दो दिन की बूंदाबांदी और गरज-चमक के बाद रविवार को कालीन नगरी के मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। 10 बजे तक कोहरे की चादर और तापमान के उतार-चढ़ाव से फरवरी के आखिर में दिसंबर और जनवरी जैसा मौसम नजर आया। घने कोहरे के कारण दिन में भी वाहनों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। कोहरे का असर यातायात पर भी पड़ा।
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दो दिन तक गरज-चमक के साथ हल्की बारिश के बाद रविवार को सुबह हुई तो मौसम का रुख बदला-बदला सा नजर आया। घने कोहरे की चादर तनी हुई थी। इससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया। महीने भर से सुबह-शाम साफ मौसम देख रहे लोग रविवार को घना कोहरा देखकर अचरज में पड़ गए। खास बात यह कि कोहरे का असर दिन के 10 बजे तक रहा। इस दौरान रेल और सड़क यातायात भी प्रभावित हो गया। सड़कों पर वाहनों की तादाद घटने से जहां यातायात का दबाव बेहद कम हो गया। वहीं सुबह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी समेत अन्य कई ट्रेनें विलंबित होकर चलीं। सड़कों पर वाहनों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। कृषि के लिहाज से इस मौसम को आलू और दलहनी-तिलहनी फसलों के लिए घातक माना गया।
कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी ने कहा कि दो दिन की बारिश फसलों के लिए फायदेमंद रही। सबसे ज्यादा लाभ गेहूं की फसल को मिलेगा। ओले गिरते तो नुकसान हो सकता था। ऐसे मौसम में आलू की फसल को पाला मारने की भी गुंजाइश रहती है। हालांकि अब ज्यादातर किसानों की फसल तैयार हो चुकी है। उन्हें खोदाई करना है। सरसों और अरहर के फूलों के लिए ज्यादा बारिश खतरा हो सकती है।
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बादलों की उमड़-घुमड़ से बढ़ी रही चिंता
ज्ञानपुर। घने कोहरे के कारण रविवार को मौसम का रुख भले ही परिवर्तित रहा हो, लेकिन आसमान में बादलों की उमड़-घुमड़ जारी थी। दो दिन तक रिमझिम फुहारों के बाद अगले 24 घंटों के दौरान भी इंद्रदेव मेहरबान हो सकते हैं, ऐसा जानकारों का मानना है। रविवार को पूरे दिन बदली छाई रही। इससे किसानों की धुकधुकी बढ़ी रही। औराई के किसान हृदय नारायण ने कहा कि ऐसे मौसम में ओले गिरने की आशंका रहती है। ऐसा हुआ तो अरहर के फूल झड़ जाएंगे। चना और मटर को भी नुकसान होगा। तमाम किसानों की सरसों की फसल खेत-खलिहानों में है। ऐसी ही पीड़ा भुड़की के हरिशंकर की भी थी।
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