अभोली ब्लाक के गौरा गांव में पांच वर्ष जर्जर होकर बंद पड़े जच्चा-बच्चा उपकेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य बनाने की मांग उठने लगी है। ग्राम प्रधान अंतिमा पांडेय ने जिला प्रशासन तक मामला पहुंचाते हुए कहा कि चार वर्ष पहले तक उपकेंद्र का लाभ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं समेत नौनि हालों को मिलता था लेकिन अब नहीं। दूरदराज स्थित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने में तरह-तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महामारी के दौर में एक ओर सरकार ग्रामीण परिवेश की स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाने का निर्देश देकर टीकाकरण, 30 बेड वाले वैकल्पिक कोविड अस्पताल की स्थापना पर माथापच्ची की जा रही है। उपकेंद्र की हालत ठीक होती तो प्रथम वरीयता मिलने में देर नहीं लगती। उपकेंद्र के न चलने से तैनात स्वास्थ्य कर्मी भी मनमानी हो चुके हैं जिनको देखने के लिए लाभार्थी तरसते हैं। आंगनबाड़ी के तहत होने वाला टीकाकरण भी ऐसे स्थान पर किया जाता है जहां पहुंचना मुश्किल रहता है। जब तक धात्री महिलाओं समेत नौनिहालों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए मिलने सुविधा की जानकारी होती है तब तक कर्मचारी खानापूर्ति कर निकल जाते हैं। भवन की हालत यह है कि कर्मचारी रुकने तक से डरते हैं। यही कारण है कि वर्तमान में किसी प्रकारकी सुविधा से वंचित ग्रामीण निजी और झोलाछाप चिकित्सकों तक जाकर आर्थिक दोहन के लिए विवश रहते ही है। अज्ञानता में झोलाछाप मरीजों की बीमारी बढ़ा देते हैं। डीएम आर्यका अखौरी, सीएमओ डा.लक्ष्मी सिंह से मिलकर उपकेंद्र की स्थिति रुबरु कराया जाएगा।