सीतामढ़ी। जिंदगी के छंदों का अलंकार हैं बेटियां, कविता के पन्नों की संस्कार हैं बेटियां। मंजिलें उन्हीं को मिलती है जिनकी सपनों में जान होती है...। भदोही के ग्रामीण अंचल की बेटियां कठिन मेहनत, लगन से आज विभिन्न क्षेत्रों में अपने प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। डॉटर्स डे पर बेटियों की सफलता की बात सुनकर हर किसी को बेटियों के सफलता पर गर्व होता है। ऽबदलते भारत में बदल लो अपनी सोच, बेटियां बनती है सहारा नहीं हैं बोझऽ की कहावत चरितार्थ करती बेटियों ने महिला सशक्तीकरण का उदाहरण पेश कर जता दिया है कि वह हर क्षेत्र में अव्वल हैं। आज डॉटर्स डे पर कुछ ऐसी ही बेटियां उन के लिए रोल मॉडल है जो अपने दम पर कामयाबी की मुकाम हासिल करना चाहती हैं।
सीतामढ़ी। बारीपुर गांव की नीशू सोनी पायलट बन हवाई जहाज उड़ाएगी। बचपन में ही उसने आसमान में उड़ने का सपना सजाया जो अब महज दो माह में पूरा होने वाला है। नीशू ने फोन पर बताया कि उसकी 167 घंटे की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। वह अकेले जहाज उड़ाने लगी है। बताया की महज 35 घंटे उड़ान की ट्रेनिंग के बाद उसे भारत सरकार से लाइसेंस मिल जाएगा। वह डीघ ब्लाक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख नीता सोनी और बिष्णु प्रकाश सोनी की पुत्री है। इंटर तक दयावंती पुंज मॉडल स्कूल में पढ़ाई के बाद दो वर्ष से पूना बारामती के रेड बर्ड फ्लाइंग एकेडमी में बतौर कामर्शियल पायलट की ट्रेनिंग ले रही है। बताया कि बचपन में ही उसने आसमान नापने का सपना देखा था। जो माता-पिता के प्रयास से सफल हो गया।
सीतामढ़ी। कोनिया के कटरा बाजार की श्वेता दूबे ने अपनी प्रतिभा के बदौलत प्रदेश और जनपद को गौरवान्वित किया है। कनाडा जैसे विकसित देश में प्रतिष्ठित बैंक ऑफ मोंट्रियाल में बतौर बिजनेस हेड के पद पर नियुक्ति हुई हैं। श्वेता के पिता श्यामधर दूबे यूपी नेडा लखनऊ में सीनियर प्रोजेक्ट आफिसर के पद पर हैं, जबकि मां अंजू दूबे गृहिणी हैं। चाचा सुरेंद्र प्रसाद दुबे ने बताया की वह शुरू से ही प्रतिभाशाली छात्रा रही है। उसने गुड़गांव से कंप्यूटर साइंस से बी.टेक किया उसके बाद मोंट्रियाल यूनिवर्सिटी कनाडा से एमबीए किया। चार माह पूर्व उसका सेलेक्शन बैंक आफ मोंट्रियाल में बैंक बिजनेस हेड के उच्च पद पर हुआ है।
सीतामढ़ी। क्षेत्र के मठहा शुक्लान निवासी आचार्य सुशील कुमार की बेटी शब्या शुक्ला कठिन मेहनत और लगन की बदौलत लोको पायलट बन अब ट्रेन चला रही हैं। उसने कहा कि वह अपनी माँ सविता शुक्ला की प्रेरणा से इस मुकाम को हासिल किया। ग्रामीण अंचल में पली बढ़ी बेटी शब्या उन लड़कियों के लिए रोल मॉडल है जो अपनी मेहनत के दम पर सफलता अर्जित कर क्षेत्र व परिवार का मान बढ़ाया। महिला सशक्तीकरण का उदाहरण पेश कर यह जता दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है। उसकी प्रारंभिक शिक्षा मां गंगा शिक्षण संस्थान सीतामढ़ी में हुई। वह प्रथम प्रयास में ही वह लोको पायलट बन गई। बताया कि वह प्रशिक्षण के बाद प्रयागराज से कानपुर की ट्रेन चला रही है।