संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और संस्कृत बोर्ड की आंखों में धूल झोंककर फर्जीवाड़ा करने वाले संस्कृत विद्यालय और महाविद्यालयों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। पद सृजन से लेकर मान्यता तक हुए गोलमाल की बारीकी से तहकीकात शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग ने एक विद्यालय को नोटिस जारी करते हुए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से जहां अभिलेख मंगवाया है, वहीं पद सृजन में गड़बड़ी करने वाले एक विद्यालय के अध्यापकों का वेतन रोक दिया है। दो अन्य विद्यालयों में भी मान्यता और पद सृजन को लेकर मामला कोर्ट में विचाराधीन चल रहा है।
सनातन और संस्कृति की शिक्षा देने के लिए कभी गुरुकुल कहे जाने वाले संस्कृत विद्यालयों में पठन-पाठन की स्थिति राम भरोसे हो गई है। प्रबंधक से लेकर प्रधानाचार्य तक अब सरकारी अनुदान लेने के साथ ही परीक्षा के नाम पर मोटी कमाई के लिए ही विद्यालयों का संचालन कर रहे हैं। जिले में संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों में बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं हैं। औराई क्षेत्र के कुरौली में बिना मान्यता के साथ ही ब्लॉक बदलकर विद्यालय चलाने का आरोप लगा है। मामला संज्ञान में आने के बाद डीआईओएस कार्यालय ने नोटिस जारी करने के साथ संपूर्णानंद से जुड़े अभिलेख मंगाए हैं।
कुरौली के विद्यालय पर आरोप है कि अभोली ब्लॉक में 1981 से पूर्व संस्कृत महाविद्यालय और एक विद्यालय संचालित हो रहे थे। 1983 में परिनियमावली के तहत परीक्षा में छात्रों की प्रविष्टि को लेकर राज्यपाल और कुलसचिव स्तर से दोनों विद्यालयों की मान्यता खत्म कर दी गई। साथ ही अभोली के नाम पर मान्यता लेने वाला स्कूल औराई में संचालित हो रहा है। इसी तरह बरवां स्थित विद्यालय में पद सृजन में गड़बड़ी होने पर शिक्षा विभाग ने पूरे स्कूल का वेतन साल भर पहले से रोक दिया है। रोहीं और बारीपुर स्थित संस्कृत विद्यालयों में भी पद सृजन से लेकर मान्यता के चलते कोर्ट में मामला विचाराधीन है।