ज्ञानपुर। डिजिटल सिग्नेचर का रजिस्ट्रेशन नहीं कराने से जिले की 415 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप हैं। ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की लापरवाही से करीब 35 करोड़ रुपये खातों में डंप पड़े हैं। जुलाई के बाद से ही राज्य और 14वें वित्त से विकास के कार्यों पर धनराशि खर्च नहीं की जा सकी। इसको लेकर जिला पंचायत राज विभाग की ओर से सभी सेक्रेटरी और एडीओ के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सरकारें गांवों के विकास पर विशेष फोकस कर रहीं हैं। 14वें और राज्य वित्त से मनरेगा, खड़ंजा, नाली निर्माण, शौचालय, आवास निर्माण समेत अन्य कार्य कराए जाते हैं। जिस पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। पांच से आठ साल पूर्व गांवों में होने वाले विकास कार्यों को अभिलेखों के माध्यम से ही दर्शाया जाता था, लेकिन अब सबकुछ ऑनलाइन हो चुका है। मानक के अनुसार काम होने पर उसकी फोटो सरकार के प्रियासॉफ्ट और जीपीडीपी सॉफ्टवेयर पर अपलोड करना पड़ता है। फोटो अपलोड होने के बाद आगे की रकम जारी की जाती है। जुलाई के बाद डिजिटल सिग्नेचर से ही पैसे का लेनदेन शुरू हो गया है। यह व्यवस्था प्रभावी होने के बाद जिले की 561 ग्राम पंचायतें डिजिटल सिग्नेचर से जुड़ गईं, लेकिन 415 ग्राम पंचायतों ने अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। इससे मात्र 146 ग्राम पंचायतों में ही विकास कार्य चल रहे हैं। 415 गांवों में अगस्त, सितंबर के बाद अक्तूबर के पहले पखवारे तक कामकाज शुरू नहीं हो सका। प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारियों की लापरवाही से संबंधित ग्रामसभाओं में विकास कार्य के लिए आए करीब 35 करोड़ डंप पड़ा है। पंचायत राज विभाग ने सभी सेक्रेटरी को चेतावनी पत्र जारी कर रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश दिया। कहा कि दीपावली से पूर्व ऐसा न करने पर विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।
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अब डिजिटल सिग्नेचर से ही सभी कामकाज हो रहे हैं। 415 ग्राम पंचायतों ने अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। सेक्रेटरी को चेतावनी पत्र जारी किया गया है। दीपावली से पूर्व रजिस्ट्रेशन न कराने पर कार्रवाई की जाएगी। - बालेश्वर द्विवेदी, डीपीआरओ