ज्ञानपुर। आपूर्ति निरीक्षक विजय प्रताप की रहस्यमय हालात में फांसी लगाकर हुई मौत के मामले में आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली की कलई भी खुल गई है। दो साल से वेतन और सर्विस बुक के लिए परेशान आपूर्ति निरीक्षक के घर का पता भी विभाग के पास नहीं था। बाद में विभाग के लोगों ने प्रतापगढ़ आपूर्ति विभाग के कार्यालय में फोन कर उसके घर के पते की जानकारी ली। प्रतापगढ़ के रानीगंज थाना क्षेत्र के भगुवा चुंगी निवासी आपूर्ति निरीक्षक विजय प्रताप यादव प्रतापगढ़ डीएसओ कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक थे। प्रमोशन होने के बाद आपूर्ति निरीक्षक हुए तो उन्हें भदोही भेजा गया। गत ढाई साल से वह नौकरी कर रहे थे, लेकिन आपूर्ति कार्यालय के पास उनकी सर्विस बुक नहीं थी और न ही मंगाया गया। इससे आपूर्ति कार्यालय की बड़ी लापरवाही सामने आई। इसके चलते उन्हें ढाई साल से वेतन नहीं मिल रहा था। डीएसओ तीर्थराज यादव ने कहा कि प्रतापगढ़ कार्यालय से सर्विस बुक और एलपीसी नहीं भेजी गई थी, जिसकी वजह से उनकी सेलरी नहीं बन रही थी। वहीं, प्रतापगढ़ के जिलापूर्ति विभाग का कहना है कि सर्विस बुक उनके यहां से भेजी जा चुकी है। अब झूठ कौन बोल रहा है, यह जांच का विषय है। ढाई साल से एक अधिकारी जिले में काम करता रहा और उसकी सर्विस बुक को लेकर विभाग बेपरवाह बना रहा। हालांकि वेतन न मिलने को लेकर परिजनों ने किसी तरह का आरोप नहीं लगाया। विजय प्रताप का सरल स्वभाव था और कोटेदारों से भी अच्छे संबंध थे। यही वजह है कि घटना से उनके जानने वाले भी सन्न हो गए थे। घटना की खबर लगते ही 300 से अधिक कोटेदार मौके पर पहुंच गए। कोटेदारों का कहना था कि विजय प्रताप का स्वभाव काफी अलग था। वह कभी कोटेदारों को परेशान नहीं करते।