अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग लड़की के अपहरण में दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक दशक पूर्व हुई इस वारदात में शुक्रवार को कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
अभियोजन के अनुसार सुरियावां थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी जियालाल बिंद ने आरोप लगाया था कि 23 मई 2008 को उसकी भतीजी की शादी थी। उस शादी में उसकी भांजी अपनी मां के साथ आई थी। 23 मई को ही रात में करीब 11 बजे विवाह मंडप के पास से उसके गांव के बाबुलनाथ बिंद और रामआसरे बहला-फुसलाकर बात कर रहे थे और हाथ पकड़कर इधर-उधर टहला रहे थे। उसकी उम्र सिर्फ सात साल थी। इसके बाद वह लापता हो गई। पता करने पर गांव के त्रिभुवन बिंद ने बताया कि रात 12 बजे उसने दोनों व्यक्तियों के साथ उसे देखा था। जब पूछा तो दोनों ने कहा कि टहलाकर पहुंचा देंगे। इस मामले में केस दर्ज कर पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। न्यायालय में पीड़िता ने बयान दिया कि दोनों ने उसे छह दिन अलग-अलग स्थान पर रखा। खाना मांगने पर मारा-पीटा जाता था और प्रताड़ित करते थे। दोनों पक्षों के तर्कों एवं बहस को सुनने के बाद न्यायाधीश अशोक कुमार दूबे की अदालत ने दोषी बाबुलनाथ बिंद और रामआसरे यादव को आईपीसी की धारा 364 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10-10 हजार अर्थदंड लगाया। अभियोजन पक्ष से बहस-पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता सुधाकर पांडेय ने किया।