नईबाजार। भदोही ब्लाक के ग्राम परगासपुर में अगस्त 2016 में पंचायत की कार्यायोजना की बैठक के दौरान एडीओ पंचायत राजेंद्र सरोज और ग्राम पंचायत अधिकारी सभाजीत को जिंदा जलाए जाने के चार आरोपियों को माननीय उच्च न्यायालय से भी राहत नहीं मिली। मामले में विजय शंकर तिवारी समेत चार लोगों के विरुद्ध् भदोही कोतवाली में एससी एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञानपुर से राहत न मिलने पर आरोपियों ने उच्च न्यायालय में याचिक दाखिल करते हुए मामले में बरी किए जाने की गुहार लगाई थी।
प्रतिवादीगण के अधिवक्ता टीएन तिवारी ने बताया कि 4 अगस्त की घटना है। जिसमे विजय तिवारी, उमेश तिवारी, श्याम सुंदर पांडेय व सुरेश तिवारी ने गांव पहुंचे एडीओ पंचायत और ग्राम पंचायत अधिकारी पर मिट्टी का तेल छिड़क कर जलाने का प्रयास किया था। मामले में उसी दिन भदोही कोतवाली में चारो के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। बताया कि जमानत पर चल रहे आरोपियों ने अपर सत्र न्यायालय ज्ञानपुर में केस को उन्मोचित करने (बगैर ट्रायल केस खारिज) का वाद दाखिल किया था जिसे न्यायाधीश ने खारिज कर दिया था।
अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा मामला खारिज करने के खिलाफ आरोपियों ने उच्च न्यायालय में वाद दाखिल कर राहत की मांग की थी। जिस पर बीते 18 जनवरी को सुनवाई करते हुए माननीय जज उमेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि प्रतिवादी के अधिवक्ता की दलील सुनने के बाद उच्च न्यायालय स्तर से निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं नजर नहीं लिहाजा वाद खारिज किया जाता है।