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भूमाफियाओं का फैला मायाजाल, अफसर भी बेहाल

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ज्ञानपुर। सुनने में थोड़ा अटपटा लगेगा पर मामला सोलह आने सच है। भूमाफियाओं के चक्रव्यूह को भेदने में अफसर असफल हो जा रहे हैं। तालाब की जमीन को पट्टा किया, निरस्त होने के बाद भी तहसील कर्मियों से साठगांठ कर उसे संक्रमणी भूमिधरी करा लिया। यही नहीं उस जमीन से लोन लिया और बाद में उसे बेच भी दिया। प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट ने एसडीएम औराई को तलब कर चुकी है। मामला जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है तहसील कर्मियों की धड़कने भी बढ़नेे लगी है।
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औराई तहसील के बीसापुर गांव में आराजी नंबर 78 एक और 78 दो जो कि तालाब दर्ज है उसे 1998 में तत्कालीन प्रधान ने अपने करीबियों और परिवार के लोगों को पट्टा कर दिया। मामला प्रशासन के संज्ञान में आया तो तत्कालीन एडीएम ने 2005 में पट्टा निरस्त कर प्रधान, लेेखपाल और कानूनगो पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। कुछ सालों बाद तहसील कर्मियों और भूमाफिया आपसी साठगांठ कर 10 बीघे से अधिक के पट्टे को संक्रमणीय भूमिधरी दर्ज करा लिया साथ ही भिदिउरा के एक बैंक से कृषि ऋण भी ले लिया। वादी विजय बहादुर पटेल ने हाईकोर्ट में वाद दाखिल किया। भूमाफियाओं की ओर से करीब दो दशक से चल रहे गोरखधंधे को लेकर कोर्ट ने सख्ती अपनाई। प्रकरण को लेकर 14 दिसंबर को एसडीएम कविता मीणा को तलब किया, जिसमें एसडीएम ने कार्रवाई के लिए मोहलत मांगी। हाईकोर्ट की सख्ती ने तहसील के कई पूर्व और वर्तमान कर्मियों और अफसरों की मुश्किलें बढ़ा दी है। जिस तरीके से बीसापुर गांव में तालाब की जमीन को लेकर जिस तरीके से कागजी हेरफेर किया गया है कई लोगों की गर्दन फंसनी तय मानी जा रही है। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि तालाब पर कब्जों को लेकर प्रशासन कार्रवाई करता है। न्यायालय में चलने वाले मामलों में आदेश पर कार्रवाई की जाती है।
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