भदोही। भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइसीटी) में सहायक प्रोफेसर डॉ. अणु मिश्रा और लेखाधिकारी दुर्गेश त्रिपाठी के बीच मारपीट मामले को आयुक्त (हस्तशिल्प) केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। घटना संज्ञान में आते मामले की जांच के लिए मंगलवार को क्षेत्रीय निदेशक वीरेंद्र कुमार ने संस्थान में दोनों पक्षों का बयान दर्ज किया। समझा जा रहा है कि मामला केंद्र सरकार और संस्थान की साख से जुड़ा होने के चलते जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर गाज गिरनी तय है।
गौरतलब है कि 13 मार्च को सहायक प्रोफेसर और लेखाधिकारी के बीच किसी बात को लेकर पहले वाद विवाद हुआ, जिसके बाद मारपीट की नौबत आ गई। इस संबंध में सहायक प्रोफेसर की तहरीर पर कोतवाली पुलिस छानबीन कर ही रही थी कि लेखाधिकारी ने कोतवाली में अपना मुकदमा दर्ज करा दिया। दोनों के मुकदमे में एक दूसरे को आरोपी बनाया गया है। चूंकि मामला केंद्र सरकार से जुड़े संस्थान का था और कार्य दिवस पर घटित हुई दोनो ही पक्षों ने अपने अपने ढंग से विकास आयुक्त कार्यालय नई दिल्ली को अवगत कराया।
संस्थान की साख विश्व भर में है और यहां के छात्रों का प्लेसमेंट दुनिया भर के देशों में होता है। इसलिए मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दे दिए गए। क्षेत्रीय निदेशक लखनऊ वीरेंद्र कुमार मंगलवार को संस्थान में दोनों पक्षों का बयान दर्ज किया। इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने मामला गोपनीय बताते हुए कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उधर मामले को लेकर संस्थान के अन्य कर्मी आहत हैं। लोगों का कहना है कि मारपीट की इस घटना को आम मारपीट की तरह देखा जाना चाहिए। इससे कुछ लोग संस्थान की साख खराब करना चाह रहे हैं जो गलत है।