ज्ञानपुर। ‘10 हजार रुपये और एक लड़की की व्यवस्था कर दो। साहब खुश हो जाएंगे तो तुम्हें नौकरी मिल जाएगी।’ महाराजा बलवंत सिंह चिकित्सालय में काम करने वाली एक महिर्ला ने सुपरवाइजर और अस्पताल के बाबू पर नौकरी देने के लिए रिश्वत के साथ ‘खुश’ करने की पेशगी मांगने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है। फिलहाल उसने श्रम विभाग से शिकायत की है।
सुरियावां थानाक्षेत्र के तुलापुर बहदुरान निवासी सुशीला देवी (55) एमबीएस अस्पताल में एक कार्यदायी संस्था के माध्यम से बतौर सफाईकर्मी नियुक्त थी। इसके लिए उसे पांच हजार रुपये मानदेय दिया जाता था। पिछले दिनों उसे यह कहकर नौकरी से हटा दिया गया था कि दो माह बाद पुन: रख लिया जाएगा। शिकायत में आरोप लगाया कि जब वह दोबारा काम के लिए आई तो सुपरवाइजर और अस्पताल के एक बाबू ने उससे 15 हजार रुपये रिश्वत मांगी। उसने असमर्थता जताई तो कहा कि 10 हजार रुपये दे दो और एक लड़की की व्यवस्था कर दो। साहब को खुश करना पड़ता है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. जयनरेश ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। लखनऊ की कार्यदायी संस्था की ओर से सफाईकर्मी काम करते हैं। इससे अस्पताल से कोई सरोकार नहीं है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी प्रतिमा मौर्य ने बताया कि श्रम विभाग अपने क्षेत्र से जुड़े बिंदुओं की जांच कर रहा है। उधर इस प्रकरण में आरोपी सुपरवाइजर और बाबू ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सुपरवाइजर ने कहा कि महिला ठीक से काम नहीं करती थी। इसलिए उसे नौकरी से हटा दिया गया है। इसके कारण वह अनर्गल आरोप लगा रही है। जबकि बाबू का कहना है कि मैं अस्पताल कर्मचारी हूं। मेरा कार्यदायी संस्था के लोगों से कोई लेना-देना नहीं है।
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मामला संज्ञान में आया है। इस संबंध में एमबीएस के अधीक्षक से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह आउटसोर्सिंग के कर्मचारी से जुड़ा मामला है। जो लखनऊ की एक कंपनी ठेके पर कर्मचारियों की नियुक्ति करती है। इससे स्वास्थ्य विभाग का कुछ लेना-देना नहीं है।
डॉ. एसएम सहाय, सीएमओ