ज्ञानपुर। अभोली विकास खंड के सेमरा (हरिकरनपुर) गांव के ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। पौने आठ लाख के गबन के मामले में उप कृषि निदेशक और आरईएस के अधिशासी अभियंता आखिरी जांच करेंगे। प्रारंभिक जांच में गांव में कराए गए विकास कार्यों में सात लाख 73 हजार की वित्तीय अनियमितता सामने आ चुकी है। डीपीआरओ कार्यालय से अंतिम नोटिस जारी कर 10 दिन के अंदर जवाब मांगा गया है। 2017 में सेमरा हरिकरनपुर गांव के ग्रामीणों ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी कि गांव में विकास कार्यों के क्रियान्वयन में अनियमितता की जा रही है। इसके बाद मामले की जांच के लिए डीएम ने बीएसए को जांच अधिकारी नामित किया था। लेकिन, उन्होंने बीच में ही जांच छोड़ दी। इसके बाद डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ ने जिला दिव्यांग जनसशक्तीकरण अधिकारी, अवर अभियंता लोक निर्माण विभाग को जांच के लिए नामित किया। फरवरी और मार्च 2018 में दोनों अधिकारियों ने विकास कार्यों की स्थलीय और तकनीकी रूप से जांच की। जांच में मनरेगा के कार्यों के अलावा शौचालय, खंड़जा आदि कार्यों में अनियमितता पाई गई थी, जिसमें प्रधान ने अपने बेटे की फर्म को सात बार में ढाई लाख से अधिक धनराशि अनुचित तरीके से दे दी थी। शासन से रोक के बाद भी विश्वास कंस्ट्रक्शन नाम की फर्म को सोलर लाइट के लिए एक लाख 93 हजार का भुगतान किया पाया गया। भुगतान के दौरान उच्चाधिकारियों का हस्ताक्षर चेक आदि पर भी नहीं पाए गए। इसी तरह शौचालय निर्माण में भी गड़बड़ी सामने आई। पूर्व में बने शौचालयों को नया दिखाकर भुगतान कर लिया गया। अफसरों की जांच में स्कूल में शौचालय निर्माण में 40 हजार, सोलर लाइट में वर्ष 2016 -17 में एक लाख 93 हजार और 2017-18 में एक लाख 93 हजार, खड़ंजा निर्माण में 18 हजार, बेटे की फर्म को दो लाख 52 हजार, शॉकपिट निर्माण में 48 हजार और मनरेगा मजदूरी में 26 हजार मिलाकर कुल 7.73 लाख से अधिक का गबन सामने आया था। दो बार नोटिस भेजने के बाद भी जवाब नहीं दिया गया। जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी और जांच अधिकारी डीडी कृषि ने अंतिम नोटिस जारी कर जवाब देने का निर्देश दिया। चेतावनी दी कि 10 दिन में जवाब नहीं देने पर जांच एवं आख्या रिपोर्ट डीएम को भेज दी जाएगी।