गोपीगंज। मांसाहार और शराब तामसी भोजन हैं। यही दोनों दुर्व्यसन के साथ अपराध, कदाचार की घटनाओं, नैतिक पतन के कारण बनते हैं। हिंसा से दूर रहे, इसमें प्रेम, दया, सेवाभाव, रहम हो वही असली हिंदू हैं। भगवान की पूजा करने वाले लोगों को शुद्ध शाकाहारी और नशे से मुक्त होना चाहिए। अशुद्ध आहार से जीवात्मा भी दूषित हो जाती है। दूषित स्थान पर परमात्मा कभी नहीं उतर सकता। चरित्र मानव धर्म की सबसे बड़ी पूंजी है। चरित्र उत्थान एवं अच्छे समाज का निर्माण करना वर्तमान की सबसे बड़ी मांग है।
यह उद्गार परम संत बाबा जयगुरूदेव जी महाराज के संस्थापित जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के राष्ट्रीय महामंत्री बाबूराम ने कही। वह सोमवार को चकपड़ौना स्थित आश्रम पर आयोजित सत्संग समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने देशी कहावत जैसा खावै अन्न, वैसा होवै मन पर प्रकाश डाला। कहा कि इंसान जब पशु प्रवृत्ति आहार करेगा तो उसकी बुद्धि स्वतः पशुवत हो जायेगी। तामसी आहार से तामसी बुद्धि होगी। शाकाहार ठंड मिजाज भोजन है। इससे मानवीय प्रेम, सेवा सहयोग, परोपकार की भावना, सहनशीलता, मानव धर्म, मानव कर्म के गुण विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के उदांत्त आदर्शों पर चलने वाले ही सच्चे सनातनी हैं। हम प्रभु श्रीराम, श्री कृष्ण आदि देवी देवताओं को मानते हैं तो हमें उनके बताए उपदेशों पर भी चलना चाहिए। प्रभु राम ने कभी नहीं कहा कि तुम पशु पक्षियों का मांस खाओ या श्री कृष्ण ने कभी नहीं कहा कि शराब पियो। इस मौके पर प्रेमशंकर मौर्य, जगदीश चंद्र, रमाशंकर, गुलाब, बबलू आदि रहे।