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मंगुरा प्रधान का प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार सीज

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ज्ञानपुर/सुरियावां। तालाब की जमीन पर शौचालय निर्माण कराना प्रधान को महंगा पड़ गया। डीपीआरओ की संस्तुति पर जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने मंगुरा गांव के प्रधान का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिया जबकि सेक्रेटरी पर विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया। गांव का विकास कार्य रूकने न पाए इसलिए तीन सदस्यों की टीम गठित करने का निर्देश दिया।
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मंगुरा गांव के जयप्रकाश उपाध्याय, श्याम सुंदर उपाध्याय समेत पांच शिकायतकर्ताओ ने कुछ माह पूर्व जिलाधिकारी को शपथ पत्र देकर गांव में व्यापक स्तर पर धांधली का आरोप लगाया था। जिसमें 77 शौचालय को तालाब की जमीन पर बनाने की शिकायत की गई थी। डीएम ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच अधिकारी नामित किया। अधिकारियों की जांच में 77 शौचालय तालाब पर बने मिले। इसके अलावा मनरेगा समेत अन्य विकास कार्यो में भी गड़बड़ी मिली। जांच रिपोर्ट मिलने पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम प्रधान अजीत यादव का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज करने की संस्तुति की, जिस पर डीएम ने कार्रवाई की। जांच अधिकारियों ने माना कि तालाब पर शौचालय का निर्माण कराने में करीब सात लाख 70 हजार खर्च हुए। तालाब की जमीन पर निर्माण अवैध होता है, जिससे कुछ समय बाद शौचालय तोड़ दिया जाएगा। उक्त खर्च को प्रशासन ने गबन माना। ग्राम पंचायत के कार्यो के संचालन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठन करने का निर्देश उपजिलाधिकारी भदोही को दिया। जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने पर सचिव और प्रधान को नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर जवाब मांगा गया था लेकिन दोनों की तरफ से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
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