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7.73 लाख के गबन में फंसे सेमरा प्रधान

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ज्ञानपुर। अभोली विकास खंड के सेमरा हरिकरनपुर गांव के ग्राम प्रधान की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। अब वह पौने आठ लाख के गबन में फंस गए हैं। नामित अधिकारी की जांच रिपोर्ट के बाद डीएम राजेंद्र प्रसाद ने नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। स्पष्टीकरण न देने पर प्रधान के अधिकार को सीज कर दिया जाएगा। इसके पूर्व भी प्रधान पर धमकी, जालसाजी, तालाब पर पट्टा देने के मामले में मुकदमा दर्ज हो चुका है।
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2017 में सेमरा हरिकरनपुर गांव के नन्हेंलाल समेत ग्रामीणों ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी कि गांव में विकास कार्यों के क्रियान्वयन में अनियमितता की जा रही है। इसके बाद मामले की जांच के लिए डीएम ने बीएसए को जांच अधिकारी नामित किया। लेकिन, उन्होंने बीच में ही जांच छोड़ दी। उसके बाद डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ ने जिला दिव्यांग जनसशक्तीकरण अधिकारी, अवर अभियंता लोक निर्माण विभाग को जांच के लिए नामित किया। अधिकारियों ने विकास कार्यों की स्थलीय और तकनीकी रूप से जांच की। जांच में मनरेगा के कार्यों के अलावा शौचालय, खंड़जा आदि कार्यों में अनियमितता पाई गई। जांच समिति की आख्या के अनुसार ग्राम प्रधान ने अपने बेटे की फर्म को सात बार में ढाई लाख से अधिक धनराशि अनुचित तरीके से दे दी थी। शासन से रोक के बाद भी विश्वास कंस्ट्रक्शन नाम की फर्म को सोलर लाइट के लिए एक लाख 93 हजार का भुगतान किया पाया गया। भुगतान के दौरान उच्चाधिकारियों का हस्ताक्षर चेक आदि पर भी नहीं पाया गया। इसी तरह शौचालय निर्माण में भी गड़बड़ी सामने आई। पूर्व में बने शौचालयों को नया दिखा कर भुगतान कर लिया गया। अफसरों की जांच में स्कूल में शौचालय निर्माण में 40 हजार, सोलर लाइट में वर्ष 2016 -17 में एक लाख 93 हजार और 2017-18 में एक लाख 93 हजार, खड़ंजा निर्माण में 18 हजार, बेटे की फर्म को दो लाख 52 हजार, शॉकपिट निर्माण में 48 हजार और मनरेगा मजदूरी में 26 हजार मिला कर कुल 7.73 लाख का गबन सामने आया। जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी की ओर से जांच रिपोर्ट डीएम को भेजी गई। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने उक्त प्रकरण में प्रधान और सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर 15 दिन के अंदर जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। चेतावनी दी है कि 15 दिन के अंदर स्पष्टीकरण न प्रस्तुत करने पर वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार को सीज कर दिया जाएगा।
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