ज्ञानपुर। गोवंश आश्रय स्थलों में रहने वाले पशुओं का स्वास्थ्य अब अच्छा होगा, उन्हें सभी 12 महीनों तक हरा चारा खाने को मिलेगा। इसके लिए पशुपालन विभाग ने योजना भी बना ली है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो एकाध महीने में इसका इंतजाम भी हो जाएगा। जिले के सभी 66 पशु आश्रय स्थलों में नेपियर घास लगाई जाएगी। इसे हर समय काटा जा सकता है। अभी जिले स्तर पर नर्सरी तैयार की जा रही है।
पशुपालन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 66 छोटे-बड़े गोशालाओं में संरक्षण ले रहे 5238 गोवंश को बारहों माह हरा चारा उपलब्ध कराने की व्यवस्था विभाग ने कर ली है। प्रथम चरण में नेपियर घास की नर्सरी पशुपालकों के साथ ही गोशाला संचालकों के लिए की जा रही है। बुधवार को सदर अस्पताल परिसर में नर्सरी का निरीक्षण सीवीओ डॉ. जय सिंह ने कर कर्मचारियों को निर्देश दिया है। कहा कि नर्सरी बेहतर होगी तो आने वाले दिनों में इससे घास भी अच्छी निकलेगी। सीवीओ ने बताया कि अभी तक गोशालाओं में संरक्षण लेने वाले गोवंश भूसा, पुआल, ज्वार-बाजरा की कुट्टी पर आश्रित थे। इन चारों को उपलब्ध कराने के नाम पर प्रति माह हजारों रुपये का भुगतान गोशाला संचालन समिति के खाते में विभाग करता है। हरे चारे की व्यवस्था न मिलने का मामला आए दिन उठता रहता है। मंथन के बाद पंजाब में पालतू पशुओं को सेहतमंद रखने वाली नेपियर घास को जिले में लाया गया है, जो हरे चारे की कमी पूरा करेगी। पशु आश्रय स्थलों में ही खाली जमीन में इसे लगवाया जाएगा।
डॉ. जय सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि घास की बुआई जड़ों से होगी और जितनी संख्या में जड़ें बोई जाएंगी उतनी मात्रा में नेपियर घास का उत्पादन होता रहेगा। एक जड़ में कम से कम 15 से 20 शाखाएं निकल कर सूडान, ज्वार, बाजरा जैसी हरी चरी का रूप लेती रहेगी।