ज्ञानपुर। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश जिला इकाई के पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित 16 सूत्रीय मांगपत्र डीएम को सौंपा। जिलाध्यक्ष प्रभाशंकर मिश्र ने कहा कि विभिन्न विभागों में तैनात संविदा कर्मियों को स्थाई दर्जा मिलने और पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली न होने पर संयुक्त परिषद आर-पार की लड़ाई लड़ेगा। महामंत्री कृष्णकुमार उपाध्याय के साथ एकजुट पदधिकारी हक-अधिकार के लिए आवाज उठाई। मांग किया कि समाप्त देय को बहाल करने, प्रदेश में निजीकरण, आउट सोर्सिंग पर रोक लगे, छठे वेतनमान की विसंगतिया दूर कर शिक्षकों को शतप्रतिशत प्रोन्नति वेतनमान मिले, शिक्षामित्रों का नियमित समायोजन किया जाए, आंगनबाड़ी, आशा बहू, होमगार्ड, पीआरडी, रोजगार सेवक, एएनएम, रसोइयां, आश्रम पद्घति, कस्तूरबा गांधी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मियों को विनियमित किया जाए, पूर्व में नियमित कर्मियों को समस्त देय का लाभ मिले, लंबित कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था कर्मचारी, शिक्षक पर लागू हो, पंचायती राज सफाई कर्मियों को ग्राम प्रधानों से मुक्त रखा जाए, शिक्षा विभाग के मृतक आश्रितों को पदोन्नति मिले, सभी शैक्षिक कर्मियों को 300 दिन के अवकाश का नकदीकरण की व्यवस्था हो, कोविड-19 में मृत कर्मचारी के आश्रितों को 50-50 लाख मुआवजा दिया जाए, 22 वर्ष से लटकी बीईओ प्रोन्नति शुरू की जाए, अधिकारी ग्रेड-पे में बढ़ोत्तरी की जाए, सिंचाई के मेट को लोक निर्माण विभाग की तरह मिले, महंगाई भत्ते के 18 माह का अवशेष एरियर प्रदत्त हो, विभागवार ग्रेड-पे 4800 में संविलीन किया जाए। इस मौके पर वकील दुबे, देवीप्रसाद तिवारी, दिलीप तिवारी, रामलाल पासी, नेबूलाल सरोज, रामआसरे, राममूर्ति, मिथिलेश गुप्ता, संतलाल बिंद, चंद्रेश कुमार, मुकेश, सुरेंद्र, भगवानदास आदि रहे।