कुलमनपुर में सामुदायिक शौचालय का हाल बदहाल। संवाद
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ज्ञानपुर। जिले की 546 ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 70 से 75 करोड़ रुपये खर्च कर 650 सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। शौचालय जब बने ताे उम्मीद जगी कि खुले में शौच की समस्या से अब मुक्ति मिल जाएगी। मगर, ग्राम पंचायतों की लापरवाही और अफसरों की उदासीनता से स्वच्छ भारत मिशन की मंशा पर पलीता लग रहा है। पांच सामुदायिक शौचालयों लोकमनपुर, बवईं, संवरपुर, कुलमनपुर और बिछियां की पड़ताल में संवरपुर और बवईं बंद मिले। जबकि गंदगी का अंबार पांचों शौचालयों पर दिखा। कुछ के परिसर में ही घास उग गई है। साल 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर स्वच्छता की मुहिम शुरू हुई। पहले दो लाख 80 हजार से अधिक एकल शौचालय बनाए गए। जिन पर करोड़ों की धनराशि खर्च की गई। उसके बाद छह से 12 लाख की लागत से हर ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण हुआ। आबादी के हिसाब से 546 ग्राम पंचायतों में 661 सामुदायिक शौचालय बनने शुरू हुए। इसमें 650 के करीब पूर्ण भी हो गए हैं। इनकी निगरानी और साफ-सफाई के लिए समूह के माध्यम से केयरटेकर भी रखी गई हैं लेकिन शौचालयों की दशा राम भरोसे ही है। शुक्रवार को संवाद एजेंसी की टीम ने सुबह आठ से 10 बजे के मध्य छह से सात गांव में शौचालयों की पड़ताल की तो स्थिति काफी खराब मिली। कहीं ताला लटका मिला तो कहीं परिसर में गंदगी पाई गई। बेलहुआ गांव में बना शौचालय ठीक नहीं मिला। शौचालय की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त है। कलीपुर में बने सामुदायिक शौचालय पर दिन में ताला बंद रहता है और सुबह-शाम खुलता है। ग्रामीण मुनीब का कहना है कि पहले खुलता था, इधर बीच दिक्कत है।
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