महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में इन दिनों जमकर कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। शासन से लेकर जिला प्रशासन के आदेश के बाद भी जिम्मेदार चिकित्सक मरीजों को बाहर की दवा लिख रहे हैं। इससे मरीजों के जेब ढीली हो रही है।
जिला चिकित्सालय में हर दिन एक हजार से 1200 मरीजों की ओपीडी होती है। इसके अलावा तकरीबन 2500 के आसपास लैब में जांच की जाती है। वहीं 50-60 की संख्या में इमरजेंसी की ओपीडी होती है। मरीजों को बेहतर उपचार के लिए 18 चिकित्सक तैनात हैं, लेकिन यहां सबसे बड़ा खेल कमीशनखोरी का चलता है। दूरदराज से दवा लेने पहुंचे मरीजों को कमीशन के चक्कर में बाहर की दवा लिखी जाती है। बीते दिनों जिले के दौरे पर आए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट रूप से बाहर की दवा न लिखने की हिदायत दी थी। इसके अलावा समय-समय पर जिलाधिकरी की ओर से भी बाहर की दवा न लिखने को लेकर हिदायत दी गई। बीते दिनों तो राज्यमंत्री ने बाहर की दवा लिखने पर चिकित्सक पर 5 हजार का जुर्माना भी लगाया था। फिर भी जिला चिकित्सालय में तैनात चिकित्सकों की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हुआ। अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को पड़ताल किया तो अस्पताल में कमीशनखोरी का नया खेल सामने आया। मरीज जब चिकित्सक के पास पहुंचता है तो उसके पास सिर्फ ओपीडी की पर्ची होती है लेकिन ओपीडी से बाहर निकलते ही उसके हाथ में दो पर्चियां होती हैं। बड़ी पर्ची पर अंदर की दवाएं और छोटी सादी पर्ची पर बाहर की दवाएं लिखी होती हैं। बिचौलिए दिन भर दवा की दुकानों और चिकित्सकों के भीड़ चक्कर लगाते रहते हैं।