कोडीनयुक्त कफ सीरप और नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) थोक दवा विक्रेताओं के लाइसेंस और गोदामों का सत्यापन करेगा। 15 से 31 मई तक विशेष अभियान चलाकर जांच की जाएगी। आयुक्त का पत्र आने पर विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। कमी मिलने पर दुकानों का लाइसेंस निलंबित किया जाएगा।
जिले में मेडिकल की 1500 छाेटी और 350 थोक दवा की दुकाने हैं। नवंबर 2025 में कोडीनयुक्त कफ सिरप कारोबार का मामला सामने आने के बाद प्रदेश स्तर से दुकानों की जांच की गई। इस दौरान भदोही में भी पांच फर्म कोडीन कफ सिरप में संलिप्त मिली। उन पर प्राथमिकी दर्ज की गई और कारोबार से जुड़े दो आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। एसआईटी और औषधि विभाग की जांच के दौरान यह पता चला कि कई थोक दवा फर्में पंजीकृत पते पर नहीं हैं। लाइसेंस लेने के बावजूद उनका संचालन ही नहीं किया गया। कई फर्मों के पंजीकृत पते पर सिर्फ भवन स्वामी ही मिले, जिन्हें दवा के लाइसेंस के बारे में जानकारी ही नहीं थी। अब एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने सहायक आयुक्तों और औषधि निरीक्षकों को थोक दवा की दुकानों का सत्यापन करने का निर्देश दिया है। लाइसेंसी फर्म की स्वीकृत चौहद्दी की स्थिति, दवाओं के भंडारण के लिए पर्याप्त व्यवस्था, प्रतिष्ठान पर उक्त व्यक्ति की उपस्थिति और उनके अनुभव प्रमाण पत्र की पुष्टि की जांच जाएगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि दवा दुकान के अलावा किसी और स्थान पर गोदाम है तो, उसका अलग से लाइसेंस लिया गया कि नहीं। इसके अलावा, सत्यापन अभियान शुरू होने से पहले थोक दवा विक्रेताओं को लाइसेंस वापस करने का मौका भी दिया जाएगा। कमी मिलने पर फर्म संचालक पर कार्रवाई की जाएगी।
- कुमार सौमित्र, औषधि निरीक्षक भदोही ने कहा किकोडीन युक्त सीरप की अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान चलाया गया था। थोक दवा फर्मों में कई गड़बड़ियां मिली थीं। इसी के बाद एफएसडीए ने लाइसेंस लेने की प्रक्रिया में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही पुराने लाइसेंस का सत्यापन भी कराया जाएगा। 350 दुकानों की जांच की जाएगी। कमी मिलने पर कार्रवाई होगी। कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी मामले में जिले की पुलिस ने अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जनवरी 2026 में औराई के माधोसिंह स्टेशन के पास से पूर्णा फर्म के संचालक शैलेंद्र तिवारी निवासी भिखारीदास लेन भारतेंदु भवन वाराणसी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में आरोपी ने 12 करोड़ से अधिक के लेनदेन और फर्जी ई-वे बिल बनाने की बात स्वीकार की थी। अप्रैल 2026 को विजय गुप्ता निवासी गोला दीनानाथ, वाराणसी को मानिकपुर तिराहे से गिरफ्तार किया था।