बारिश के बाद उमस और गर्मी बढने से जिले में मौसमी बीमारियों ने पांव पसार लिया है। इसके चलते बच्चे, बूढ़े से लेकर नौजवान तक बीमारियों की चपेट में आकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे सरकारी हो या प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। सरकारी अस्पतालों में मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए अलग से व्यवस्था न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को जिला अस्पताल के इमर्जेंसी वार्ड मौसमी बीमारियों के मरीजों से भरा रहा।
बदलते मौसम में खान-पान में सावधानी न रखना रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे लोगों के लिए मौसमी बीमारी का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा उमस और धूप में बिना सावधानी बरते आवागमन मौसमी बीमारी का कारण बन रहा है।
बुधवार को जिला अस्पताल के इमर्जेंसी वार्ड में सुबह से लेकर शाम तक उल्टी-दस्त, ऐंठन, मरोड़, वायरल फीवर आदि बीमारी से पीड़ित करीब 45 मरीज भर्ती हुए। इसके अलावा काउंटर पर भी करीब साढ़े छह सौ पर्चियां काटी गई। सुबह से लेकर दोपहर बाद तक अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की कतार लगी रही। वहीं इमर्जेंसी में भर्ती मरीजों के तीमारदार भी भागदौड़ से परेशान रहे।
यही हाल गोपीगंज, सुरियावां, भदोही, औराई, डीघ स्थित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी रहा। खास बात कि बारिश के चलते हैंडपंपों और
आपूर्ति पेयजल भी गंदा पानी दे रहे हैं। इसके इस्तेमाल से भी लोग मौसमी बीमारी की चपेट में आ रहे हैैं। मौसमी बीमारियों के कहर से गांव, नगर और मोहल्ले में परिवार का कोई न सदस्य पीड़ित है।