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कागजों में सिमटा गावों का प्लास्टिक मुक्त मिशन

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ज्ञानपुर। स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण में ग्राम पंचायतों को प्लॉस्टिक मुक्त करने की मुहिम जिले में कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। प्रशासन का दावा है कि 115 ग्राम पंचायतों के करीब 300 राजस्व गांव को प्लॉस्टिक मुक्त कर दिया गया है, जबकि धरातल पर हकीकत इसके उलट है। अब भी संबंधित गांवों में प्लॉस्टिक का प्रयोग नहीं थमा है।
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2014 में देश में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए मुहिम शुरू की। इसके तहत हर घर में शौचालय का निर्माण कराकर जिले को खुले में शौच से मुक्त किया गया। जिले में एक लाख 80 हजार नए शौचालय बनाए गए और 2018 में जिले की 561 ग्राम पंचायतें ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) हो गई। हालांकि मानक पूरा न करने पर कुछ ग्राम पंचायत ओडीएफ की सूची से बाहर हो गईं। ऐसे गांवों में व्यवस्थाओं में सुधार हो रहा है। 2019 में दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने तो गांवों को प्लॉस्टिक मुक्त करने की मुहिम शुरू हुई। जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए विशेष अभियान चलाया गया। पंचायत राज विभाग की ओर से जिले की 115 ग्राम पंचायतों के 300 राजस्व गांवों को प्लॉस्टिक मुक्त किया गया, जिसमें गंगा से सटे छेछुआ, दानीपट्टी, इटहरा, कलिक मवैया, कूड़ीकला, मवैयाथान सिंह, नगरदह, पुरवां, सेमराध, तुलसीचक समेत 47 गांव शामिल रहे। इसी तरह भदोही में फुलवरिया, लखनपुर, अहमदपुर फुलवरिया और ज्ञानपुर ब्लॉक में जोरईं, जगधरा, थानीपुर, लखनो आदि गांव शामिल रहे। औराई, सुरियावां और अभोली के भी कई गांव शामिल हुए। स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक सरोज पांडेय ने कहा कि 115 गांव को प्लॉस्टिक मुक्त किया गया है। इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं है। जागरूकता, गोष्ठी के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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