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स्टोर इंचार्ज के आवास पर मिली दवाओं का हो रहा मिलान

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ज्ञानपुर। कोविड-19 के संक्रमण काल में जरूरी दवाओं को आवास पर डंप करने वाले स्टोर इंचार्ज और फार्मासिस्ट आलोक पांडेय को भले ही स्वास्थ्य महकमे का आशीर्वाद मिल रहा हो, लेकिन प्रशासन बख्शने के मूड में नहीं है। डीएम ने दवाओं का सत्यापन पूर्ण होने पर विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया। विभाग यह सत्यापन करा रहा है कि कितने लाख की दवाएं आवास से बरामद हुईं। विभागीय सूत्र 50 लाख की दवाओं का अनुमान लगा रहे हैं।
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कोरोना महामारी के बीच शासन और प्रशासन आम आदमी की सुरक्षा को लेकर विभिन्न प्रकार के किट्स,दवाएं हर जिले में भेज रही है, लेकिन भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारी और कर्मचारी शासन की मुहिम को पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे।
शुक्रवार को ज्ञानपुर नगर के महेंद्र कटरा स्थित फार्मासिस्ट के आवास से लाखों की दवाएं बरामद होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग मामले में मिला जुलाकर शांत दिख रहा है। सरकारी अस्पतालों में भेजी जाने वाली दवाएं यहां पर किस लिए रखी गई थी यह एक यक्ष प्रश्न बन चुका है। उसकी कालाबाजारी होती या कुछ और यह जांच का विषय है।
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फार्मासिस्ट की काली करतूत का पता स्वास्थ्य विभाग को 5 मई को लगी या पूर्व में साठगांठ के सहारे यह खेल चल रहा था।
सूत्रों की माने तो सीएमओ दफ्तर के दो लिपिकों की भी इसमें मिलीभगत है। जो फार्मासिस्ट से मिले थे। मामला प्रकाश में आने से खुद की गर्दन फंसती देख स्टोर इंचार्ज को ही बचाने में लग गए। इतने बड़े मामले में स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी तमाम सवाल खड़े कर रही है। लाखों की दवाओं की बरामदगी से पूर्व सामान्य धाराओं में बिना गिरफ्तारी वाली धाराएं भी लगाई गई। सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह भी प्रकरण में ज्यादा कुछ कहने से बच रही हैं, हालांकि प्रशासन सख्ती के मूड में दिख रहा है।
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