ज्ञानपुर। सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ का श्रद्धापूर्ण उल्लास श्रद्धालुओं के सिर चढ़कर बोला। बिहार और बनारस के रास्ते कालीन नगरी पर छाई छठी देवी की कृपा शनिवार को घाटों पर चहुंओर बरसती दिखी। हर खास-ओ-आम सूर्योपासना की भक्तिमय बेला में श्रद्धावनत था। आम आदमी से लेकर बड़े अधिकारी-व्यवसायी वर्ग तक के लोग पूरे आस्थाभाव से घर की पवनी (छठ का व्रत रखने वाली महिला) को अर्घ्य दिलाने में जुटे रहे।
छठ पूजा वाले घरों में दोपहर बाद अर्घ्य की तैयारी शुरू हो गई। बच्चों से लेकर बड़ों तक में घाट पर पहुंचने को लेकर उत्सुकता थी। ढोल-नगाड़े की थाप पर थिरकते हुए लोग घाटों की ओर बढ़ रहे थे। छठ के नितांत पारंपरिक गीत शरीर में सिहरन पैदा कर रहे थे। छठ के पवित्र वातावरण में घुल रहे छठ के गीत मानो मन-मस्तिष्क में ऊर्जा भर रहे हों। यों तो घाटों और सरोवरों पर दोपहर बाद तीन बजे से ही अर्घ्य देने वालों का जमावड़ा शुरू हो गया था, लेकिन चार बजे के बाद घाट श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच हो गए। ज्ञानपुर नगर की हृदयस्थली ज्ञानसरोवर की सीढ़ियां अनगिनत महिला, पुरुषों और बच्चों से पट गईं। भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिए जाने के इंतजार में हर किसी की आस्था से भरी बेताबी देखते बन रही थी। उससे कहीं ज्यादा उत्सुकता पूजा को देखने पहुंचे लोगों में थी। नगर और आसपास के बड़ी संख्या में लोग घाटों पर पहुंचे थे। श्रद्धालुओं की भीड़ और देवी गीतों की गुनगुन से घाटों का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया था। अस्त होते सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद व्रत करने वाली महिलाओं के चेहरे पर जहां भक्तिपूर्ण सुकून नजर आ रहा था, वहीं उनके घर वाले और अन्य श्रद्धालु मनोभाव से भक्तिरस में गोते लगाते प्रतीत हो रहे थे। युवाओं में सेल्फी लेने और अपने घर की पूरी छठ पूजा को कैमरे में कैद करने की होड़ मची रही। रामपुर गंगा घाट, बेरासपुर, सीतामढ़ी और अन्य गंगा घाटों पर भी छठ पूजा का यही नजारा देखने को मिला। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिए जाने के बाद पूरी रात घाट गुलजार रहे।