औराई। पशुपालन विभाग की उदासीनता के चलते जिले के पशुपालकों को गोशाला से गोवंश प्राप्त करने के लिए बार-बार विभाग का चक्कर लगाना पड़ रहा है। पशुपालकों का कहना है कि गोवंश प्राप्त करने की कागजी प्रक्रिया जटिल है। इसलिए योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिले के 28 अस्थायी और तीन स्थायी गोशालाओं में लगभग 6789 गोवंश संरक्षित हैं। शासन का निर्देश है कि जो पशुपालक गोवंश को गोद लेना चाहे। उन्हें एक आधार कार्ड पर चार गोवंश दिया जा सकता है। शासन की ओर से उन्हें प्रति गोवंश 50 रुपये का भुगतान भी किया जाएगा। औराई ब्लाक के चीनी मिल गोशाला पर इनदिनों अधिकांश पशुपालक गोवंश लेने पहुंच रहे हैं, लेकिन कागजी प्रक्रिया अपूर्ण होने के कारण उन्हे गोवंश नहीं मिल रहा है। औराई के काशी सहकारी चीनी मिल परिसर में आवारा गोवंश और हाईवे पर पकड़े जाने वाले गोवंश को रखा जाता है, जहां कुल 691 गोवंश संरक्षित हैं। इसमें कुछ अच्छी नस्ल की गोवंश है। जिसे लेने के लिए पशुपालकों में जिज्ञासा उत्पन्न होती है। पशु चिकित्सा अधिकारी के यहां सिर्फ आवेदन करने मात्र से गौशालाओं से पशु नहीं मिल रहा है। इसके लिए हलफनामा बनवाना पड़ता, जांच पड़ताल के बाद जिला कमेटी से इसकी स्वीकृति के बाद गोशाला से गोवंश मिलता है। औराई पशु चिकित्सा अधिकारी रेणुका पटेल व खंड विकास अधिकारी नवीन कुमार गुप्ता ने बताया कि पशुपालक गोशालाओं से पशु लेना चाहते हैं, वह पशु चिकित्सा अधिकारी औराई के यहां आवेदन करें। जिनका आवेदन अनुमोदन होने के बाद जिला कमेटी के पास जाएगा। वहां से स्वीकृति होने के बाद ही गोवंश मिलेगा। सीधे गोशाला से गोवंश नहीं दिया जाता है।