भदोही। प्रधानमंत्री के घोषित 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज के लिए बुधवार की शाम कालीन उद्यमियों की निगाहें वित्तमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस पर टिकी रहीं। वित्तमंत्री ने कालीन उद्योग के लिए स्पष्ट रूप से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन एमएसएमई के 15 हजार तक वेतन वालों को सरकार की ओर से ईपीएफ देने की घोषणा की। इसके अलावा एमएसएमई सेक्टर को तीन लाख करोड़ लोन बिना गारंटी दिए जाने की भी बात कही। हालांकि कालीन उद्यमी कैश इंसेंटिव, इंट्रेस्ट सबवेंशन, इंपोर्ट लाइसेंस, ड्यूटी ड्रॉबैक बढ़ाए जाने की मांग कर रहे थे।
पिछले 50 दिन के लॉकडाउन में विभिन्न उद्योगों के साथ-साथ कालीन उद्योग की कमर भी टूट गई है। 40 दिन तक काम पूरी तरह ठप रहने के बाद जिला प्रशासन ने कालीन उत्पादन शुरू करने की अनुमति तो दी, लेकिन मजदूरों के घर भागने की फिक्र के चलते उत्पादन अपनी लय को नहीं प्राप्त कर सका है। एकाएक लॉकडाउन से पस्त मजदूरों की लालसा अपने घर परिवार से मिलने की रही। यही कारण है कि जिला प्रशासन के सहयोग से अब तक सैकड़ों मजदूर अपने घर जा चुके हैं।
कालीन उद्यमियों का कहना है कि एमएसएमई सेक्टर को ईपीएफ में राहत ठीक है, लेकिन जिस प्रकार से कालीन उद्योग पर कोरोना का दूरगामी परिणाम हुए हैं, उससे हमें लोन नहीं बल्कि आर्थिक सहायता की दरकार है। कुल मिलाकर उद्यमी खुद से यह सवाल पूछ रहे हैं कि उद्योग कब तक पटरी पर आएगा? कहा तो जा रहा है कि कालीन उद्योग पर एक समस्या नहीं है। इसके पटरी पर आने में वर्षों लग सकते हैं।
लॉकडाउन से सबसे अधिक कालीन उद्योग प्रभावित हुआ है। कालीन और हैंडलूम सेक्टर में सवा करोड़ लेबर लगे हैं। इन लेबरों को ध्यान में रखते हुए सेक्टर को दो वर्ष तक बैंक की सहूलियतों को बेहतर की जाए। प्री और पोस्ट शिपमेंट की क्रेडिट की सुविधाएं जो 6 माह थी उसे 15 महीने करने की मांग हम पहले ही कर चुके हैं। इंट्रेस्ट सबवेंशन योजना (बैंक ब्याज इंसेंटिव) का नवीनीकरण किया जाए। -सिद्धनाथ सिंह, चेयरमैन कालीन निर्यात संवर्धन परिषद
समस्या तो सभी उद्योगों के सामने आई हैं। लेकिन कालीन उद्योग से लाखो बुनकरों, मजदूरों की जीविका चल रही है इसलिए मैं मजदूर परक उद्योगों को विशेष रियायत की मांग प्रधानमंत्री से करता हूं। सरकार को गरीब मजदूरों बुनकरों का ध्यान देते हुए कालीन उद्योग के लिए विशेष रियायतों की घोषणा करनी चाहिए ताकि तेजी से सुधार हो सके। -ओएन मिश्र, अध्यक्ष-आल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन
कालीन उद्योग से काती व्यवसायी सीधे जुड़े हैं। स्पिनिंग प्लांट स्थापना में सब्सिडी मिले। भेड़ पालकों को कृषक का दर्जा मिले साथ ही उन्हें भी कृषकों के जैसे भत्ता मिले। वाटर प्रदूषण से बचाने के लिए सामूहिक ईटीपी स्थापना में सब्सिडी की प्रावधान हो। साथ ही हमारे मजदूरों की आर्थिक सहायता की जाए ताकि उनको नुकसान की भरपाई हो सके। -रमेश काबरा, अध्यक्ष-आल इंडिया कारपेट यार्न स्पिनर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन
प्रधानमंत्री ने जो पैकेज की घोषणा की है उसे बेहद गंभीरता से वितरित करना होगा। कोविड-19 ने सबसे अधिक प्रभाव मजदूरों पर डाला है। इसलिए रियायतों की घोषणा करते हुए मजदूरों को ध्यान में रखना चाहिए। इंट्रेस्ट सबवेंशन योजना का नवीनीकरण और ब्याज राहत मिलने से कालीन उद्योग को उबारा जा सकता है। यह बेहद अहम है। -उमेश कुमार गुप्ता, प्रशासनिक सदस्य सीईपीसी
कोविड-19 के विश्वव्यापी असर को देखते हुए यह समझा जा सकता है कि हम पर उत्पादन से लेकर, माल तैयारी व निर्यात हर क्षेत्र में असर पड़ा है। इसलिए रियायतों पर भी गंभीरतापूर्वक विचार करना होगा। हमारे सामने यह भी समस्या है कि हम शुरू कहां से करें। इसको देखते हुए हमें बड़ा हिस्सा मिलना चाहिए तब जाकर स्थिति सामान्य होगा। -वासिफ अंसारी, प्रशासनिक सदस्य सीईपीसी
हमारी समस्या बहुआयामी है। हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री कालीन निर्यात पर 10 प्रतिशत कैश इंसेटिव की घोषणा करें। कैश इंसेंटिव पूर्व में मिला करता था 20 प्रतिशत तक होता था जो धीरे धीरे बंद हो चुका है। कैश इंसेटिंव का सीधा लाभ हमें मिलेगा जो मजदूरों तक पहुंचेगा। इसके अलावा सरकार कुछ भी देगी वह नाकाफी होगा। -रवि पाटोदिया, पूर्व अध्यक्ष आल इंडिया कारपेट मुनैफैक्चरर्स एसोसिएशन