भारतीय उत्पादों पर यदि अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत ही रहा तो भारत का अमेरिकी में कारपेट बाजार समाप्त हो जाएगा।
ऑल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के दो पूर्व अध्यक्षों का मानना है कि 25 फीसदी तक टैरिफ रहता है तो किसी तरह से अमेरिकी खरीदारों को बचाए रखने में मदद मिल सकेगी।
इस समय स्थितियां भारत के अनुकूल नहीं हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ थोपने के बाद भारत के कई प्रतिस्पर्धी देशों पर बहुत कम टैरिफ रखा है।
यही एक बात भारतीय कालीन उत्पादकों को सता रही है। अमेरिका ने चीन पर 30 प्रतिशत, पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत, बेल्जियम और तुर्किए पर 15 प्रतिशत और नेपाल व ईरान पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया है।
इन सभी देशों में भी कालीन का उत्पादन होता है और भारत के ये परंपरागत प्रतिस्पर्धी देश माने जाते हैं। भारी भरकम टैरिफ थोपे जाने के बाद भारतीय कालीन उत्पादकों को कुछ सूझ नहीं रहा है।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के साथ व्यापारिक समझौता कर टैरिफ शून्य करा लिया है, लेकिन यहां के लोगों का कहना है कि ब्रिटेन को मामूली कालीन और हस्तशिल्प उत्पाद जाते हैं। ऐसे में ब्रिटेन से कुछ खास हासिल होने वाला नहीं है। अमेरिका ने अन्य कालीन खरीदार देशों कनाडा पर 35 प्रतिशत, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन व चीली पर 10 प्रतिशत तथा फ्रांस, जर्मनी, नीदरनैंड, डेनमार्क, स्लोवाकिया, फिनलैंड जैसे कालीन खरीदने वाले देशों पर 15 प्रतिशत टैरिफ लगाया है।
एकमा के पदाधिकारियाें का कहना है कि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिंतन कर कालीन निर्यातकों के हित में फैसला लेना चाहिए। कालीन उद्योग को बचाने के लिए कदम उठाना चाहिए।