शिकायतों के बाद टीम सत्यापन के लिए जाती है। उसके बाद भी उनका राशन कार्ड निरस्त नहीं किया जाता है। दूसरी तरफ कई पात्र ऐसे हैं, जो पात्र होने के बाद भी राशन नहीं पाते। घोसिया के सदर रोड निवासी इंतेखाब आलम ने पांच साल में अब तक पांच कार्ड बनवाए और हर माह 1.75 क्विंटल खाद्यान्न ले रहा है। मामले की शिकायत आईजीआरएस पर की गई तो इसकी जांच हुई। जांच में सारे कार्ड फर्जी निकले।
डीएम के निर्देश पर औराई पूर्ति निरीक्षक ने जांच की तो उसकी कार्पेट कंपनी मिली। वह लक्जरी गाड़ी थार का मालिक निकला और जीएसटी जमा करने वाला था। इससे पांचों कार्डों को निरस्त करने की संस्तुति की। जिले में तमाम ऐसे लोग हैं, जो अपात्र होते हुए भी राशन कार्ड का लाभ उठा रहे हैं।
भदोही ब्लॉक के धसकरी गांव में सत्यनारायण के पास ट्रैक्टर व जेसीबी जैसे वाहन हैं। इसके बाद भी उन्हें राशन मिल रहा है। इसी गांव के लक्ष्मी, हृदयनारायण, हरिशंकर पाल, समरनाथ, राजेश दुबे के पास कई बीघा जमीन है। फिर भी राशन कार्ड का लाभ लिया है। सुरियावां ब्लॉक के अर्जुनपुर निवासी मुलायम बिंद व उनके बेटे के नाम से भी राशन कार्ड है। इन सभी मामलों में शिकायत भी की गई है।