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Bhadohi News: रोपाई के सीजन में सूखीं नहरें, किसानों की आंखों में पानी

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सुखा पड़ा गड़ौरा रजवाहा। संवाद - फोटो : Archive
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जिले के 75 गांवों में नहर में पानी न होने के कारण धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। सिंचाई विभाग ने 13 जुलाई को पंप कैनाल के आठ पंपों को चालू कर दिया। प्रति सेकेंड 1200 क्यूसेक पानी निकल रहा है। विभाग का दावा है कि सभी माइनरों और रजबाहाें में पानी पहुंच गया है लेकिन चार दिन बाद भी गड़ौरा और चौराकला रजबाहा में पानी नहीं पहुंचा है। इससे 75 गांवों के सात हजार किसान की धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।
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अबकी बार मानसून की बेरूखी ने किसानों को परेशान कर दिया है। जुलाई की शुरूआत में कुछ दिन हल्की बारिश हुई। बारिश के भरोसे खेती करने वाले किसानों को एक बार फिर मौसम ने दगा दे दिया है। इससे धान की नर्सरी तैयार होने के बाद भी किसान रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। प्रयागराज के केहुनी स्थित ज्ञानपुर पंप कैनाल से भदोही, वाराणसी और प्रयागराज की 87 हजार हेक्टेयर की सिंचाई होती है। बारिश की स्थिति देखते हुए 13 जुलाई को ज्ञानपुर पंप कैनाल के आठ पंप को चालू कर दिया गया था। विभाग का दावा है कि एक पंप से 150 क्यूसेक पानी प्रति सेकेंड निकल रहा है। आठ पंप से 1200 क्यूसेक पानी मुख्य नहरों में जा रहा है। सभी जगह पानी पहुंच रहा है। शनिवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो लठियां माइनर, ज्ञानपुर मुख्य नहर, जोरईं माइनर में पानी मिला, लेकिन गड़ौरा रजबाहा और चौरीकला माइनर में पानी नहीं दिखा। गड़ौरा रजबाहा में पानी न आने से फत्तूपुर, गड़ौरा,श्रीपुर, आदियापुर, ख्योंखर, गुआली, कनकपुर, भीखमापुर, बसवापुर समेत 50 से अधिक गांवों के किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। किसान राकेश पांडे ,जीत नारायण शुक्ला, गोपाल सिंह, भोलानाथ यादव, रमेश सिंह ,अतुल सिंह, धर्मराज बिंद,सीताराम गोसाई, प्रमोद यादव आदि ने कहा कि पानी न आने से रोपाई में विलंब हो रहा है। किसानों ने सिंचाई विभाग से तत्काल रजबाहा में पानी छोड़ने की मांग की। इसी तरह चौराकला माइनर में पानी नहीं आ रहा है। किसानों का कहना है कि प्रयागराज सीमा पर ही फाटक से पानी को रोक दिया गया है, जिससे क्षेत्र में पानी नहीं आया। एक- अभोली ब्लॉक के गड़ौरा रजबाहा से 50 गांव जुड़े हैं। इससे पांच हजार किसानों की सैकड़ों एकड़ की सिंचाई रबी और खरीफ सीजन में होती है। मुख्य समय पानी न आने से किसान परेशान है। बारिश न होने से खेत खाली है। डीघ ब्लॉक के चौरा कला माइनर से ऊंज, सीकीचौरा, अईनछ समेत 25 गांवों में सिंचाई की जाती है। दो हजार से अधिक किसान इस पर निर्भर हैं, लेकिन रोपाई के समय पानी न आने से किसान चिंतित है।
- रविकांत बिंद, कुरमैचा ने कहा कि चौरा कलां के किनारे करीब एक एकड़ खेत है। मेरी खुद चार बीघा जमीन है। पानी न होने से खेती प्रभावित हो रही है। धान की रोपाई का सीजन चल रहा है।
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सुखराज यादव, चौरा कलां ने कहा कि नहर के किनारे लगभग तीन बीघा जमीन है। नहर में पानी न आने के कारण धान की रोपाई नहीं हो पा रही है, खेत सूखा पड़ा है। बारिश भी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई। समझ नहीं आ रहा क्या करें। धीरज यादव, बसवापुर ने कहा कि मेरी दो बीघा जमीन है। गड़ौरा रजबाहा में अब तक पानी नहीं पहुंच सका है। जिससे धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। बारिश नहीं हुई। अब निजी नलकूप ही सहारा हैं। - उमेश सिंह, गुवाली ने कहा कि इस समय रोपाई का सीजन चल रहा है। स्थिति यह है कि अब तक रजबाहा में पानी नहीं आ सका है। बारिश न होने खेती प्रभावित हो रही है। जल्द बारिश नहीं हुई तो परेशानी होगी। खरीफ सीजन में इस बार 24 हजार हेक्टेयर धान की रोपाई का लक्ष्य शासन से निर्धारित किया है। मानसून की बेरूखी और पानी की समुचित व्यवस्था न होने से किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। जिसके कारण 24 हजार हेक्टेयर के सापेक्ष अब तक 10 हजार हेक्टेयर भी धान की रोपाई नहीं हुई है। बारिश न हुई तो इस कम लक्ष्य को पूर्ण कर पाना मुश्किल होगा। 2025 में करीब 39 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई थी। मौसम विभाग के मुताबिक जुलाई माह की औसत बारिश 286 मिलीमीटर है। इसके सापेक्ष अब तक 107 मिमी बारिश दर्ज हुई है। माह का एक पखवाड़ा बीत गया, 50 फीसदी भी बारिश नहीं हुई है। बीते साल जुलाई में 287 मिमी बारिश हुई थी। लक्ष्य से एक एमएम अधिक बारिश हुआ था। आगामी दिनों में यदि बारिश नहीं हुई, तो धान की फसल प्रभावित होना तय है।

वर्जन
बारिश न होने से पानी की मांग काफी अधिक है। गड़ौरा रजबाहा में एक सप्ताह पहले तक पानी आया था। दो से तीन दिनों में दोबारा छोड़ा जाएगा। चौराकला माइनर में प्रयागराज के समीप कुछ लोगों ने फाटक बंद किया है। फाटक खोलने के लिए जेई के मौके पर भेजा गया है। - सुधीर कुमार पाल, एक्सईएन सिंचाई
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