शुल्क वसूलने के बाद भी जिले में गैस उपभोक्ताओं को होम डिलेवरी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। एजेंसियों की ओर से कागजों पर ही होम डिलेवरी कर दी जा रही है।
इससे एजेंसियों पर उपभोक्ताओं और कर्मचारियों से आए दिन तू-तू मैं-मैं हो रही है। प्रशासनिक अधिकारी और विभाग के अफसर भी होम डिलेवरी को लेकर ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
गैस के लिए उपभोक्ताओं को ठंड में भी सड़क पर लंबी लाइन पड़ रही है, इसकी एक बानगी गुरुवार को ज्ञानपुर नगर में देखने को मिली, जहां सड़क पर गैस सिलेंडर के लिए लोगों की लंबी लाइन लगी थी, उपभोक्ताओं के चेहरे पर होम डिलेवरी नहीं होने का गुस्सा साफ दिख रहा था।
एजेंसी संचालकों की मनमानी के कारण गैस के लिए लोगों को लाइन लगानी पड़ रही है। सूत्रों की माने तो आम लोगों को होम डिलेवरी की सुविधा के नाम पर 15 से 40 रुपये शुल्क भी लिया जाता है, लेकिन होम डिलेवरी नहीं दी जाती। इससे उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पडता है।
कड़ाके की ठंड में गैस के लिए सड़क पर वाहन का इंतजार करना तथा गाड़ी आने पर लाइन में लगकर गैस लेना उनकी मजबूरी बन गई है। ज्ञानपुर नगर समेत गोपीगंज एवं अन्य क्षेत्रों में गैस की होम डिलेवरी नहीं होने से उपभोक्ताओं में खासी नाराजगी है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी संचालक विभागीय अधिकारियों से सांठ-गांठ कर होम डिलेवरी की सुविधा देने से बच जाते हैं।
उनका कहना है कि विभागीय अधिकारी कार्रवाई करने की बजाय आफिस में बैठकर लिखित शिकायत का इंतजार करने की बात कह रहे है, जबकि परेशानी उन्हें उठानी पड़ती है।
मालूम हो कि वर्ष 2009-10 में तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह की सख्ती के चलते होम डिलेवरी की सुविधाएं उपभोक्ताओं को मिलने लगी थी लेकिन बाद में स्थिति जस की तस हो गई।