अपनी भव्यता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध धार्मिक स्थली सीतामढ़ी में स्थित 108 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा की 71 फीट लंबी पूंछ मंगलवार की रात करीब एक बजे तेज आवाज के साथ धराशायी हो गई। हनुमान जी की पूंछ इतनी भारी थी की उसकी चपेट में आने से कंक्रीट, सरिया सीमेंट से बनी कृत्रिम पहाड़ी भी ध्वस्त हो गई। घटना आधी रात के बाद 12.42 बजे हुई। उस समय मंदिर बंद था अन्यथा बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। लोग बताते हैं कि पूंछ गिरने की आवाज दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिससे लोग सहम गए।
मंगलवार को सीतामढ़ी में मूसलाधार बारिस हुई थी। उसी दौरान तेज आवाज के साथ बिजली भी गिरी थी। हालांकि उस समय कोई समझ नहीं पाया और सायंकालीन आरती, भोग, पूजा पाठ के बाद मंदिर के पुजारी ने नियत समय पर मंदिर के कपाट बंद कर दिए।
दिन में हुई बारिस के पानी से सीमेंट, कंक्रीट, सरिया से निर्मित पूरा ढांचा बारिस के पानी से तर बतर हो गया था। कयास लगाया जा रहा है कि बिजली गिरने के बाद ही पूंछ में दरार आ गई थी। आधी रात को पूंछ भरभरा कर गिर गई। इससे लाखों का नुकसान हुआ। तेज आवाज सुनने के बाद सीतामढ़ी चौकी इंचार्ज तारुणेंद्र त्रिपाठी पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गए। हनुमान प्रतिमा की पूंछ गिरने के बाद परिक्रमा मार्ग बंद हो गया। मार्ग पर भारी मलबा जमा हो गया, जिसे हटाने का काम शुरू कर दिया गया।
ट्रस्ट के प्रबंधक कैलाश चंद्र ने बताया कि रात को अचानक पूंछ और प्रतिमा को सपोर्ट देने वाले पिलर गिरने से काफी लंबी पूंछ पहाड़ी पर गिर गई। कहा कि मलबा हटाने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। सुरक्षा के मद्देनजर आम जनता के लिए कुछ दिनों के लिए मंदिर के गर्भ गृह में जाने के लिए रोक लगा दी गई है। दिल्ली से इंजीनियरों की टीम बुलाई गई। इंजीनियरों के निरीक्षण के बाद ही मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।