तीन साल के अंदर ही जर्जर हो चुके भवन के अंदर शिक्षक बच्चों को पढ़ाने से कतराते हैं। इससे तीन साल से वह बरामदे और पेड़ के नीचे ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं। नए भवन को लेकर विभाग को कई बार पत्र भेजा गया लेकिन उस पर कोई अमल नहीं हुआ।
अनेगपुर इकलौता मामला नहीं है। जिले में करीब 20 से अधिक ऐसे विद्यालय हैं जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं।
सितंबर 2009 में करीब छह लाख की लागत से भदोही ब्लाक के अनेगपुर गांव में बना पूर्व माध्यमिक विद्यालय 2013 में ही पूरी तरह जर्जर हो गया।
छठवीं, सातवीं और आठवीं की कक्षाओं की फर्श और दीवार इस ढंग से जर्जर हो चुकी है कि स्कूल के शिक्षक भवन में बच्चों को बिठाने से कतराते हैं। स्थिति यह है कि शिक्षक प्रतिदिन बच्चों को स्कूल के बरामदे या खुले आसमान के नीचे बिठाकर पढ़ा रहे हैं।
स्कूल में भवन न होने से बच्चों की संख्या भी लगातार घटती जा रही है। 2013 में बच्चों की संख्या जहां 120 थी वहीं 2014 में 96 तक पहुंच गई। 2015 में बच्चों की संख्या 56 तक आ गई है।
हेडमास्टर मुन्ना सिंह और ग्रामीण लाल बहादुर यादव ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और जिलाधिकारी को कई बार प्रार्थना पत्र देकर नए भवन की मांग और निर्माण की जांच कराने की आवाज उठाई लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं हो सका। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो डीघ, भदोही, औराई, सुरियावां, अभोली और ज्ञानपुर ब्लाक में ऐसे 20 विद्यालय हैं जहां जर्जर भवन होने से कक्षों में बच्चे बैठने से हिचकते हैं।