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Bhadohi News: 12 बार सांप ने डसा, समय से पहुंचीं अस्पताल तो बच गई जान

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ज्ञानपुर। चौरी थाना क्षेत्र के धनवतिया गांव निवासी प्रतिमा देवी (32) को सांप ने डंस लिया। परिजन अस्पताल जाने की बजाय पांच जगहों पर झाड़फूंक में लगे रहे। इस बीच प्रतिमा की मौत हो गई। दूसरी तरफ बीते बुधवार को ऊंज क्षेत्र के चकप्रेमवीर निवासी मंजू देवी को एक साल में 12वीं बार सांप ने डंसा, लेकिन हर बार समय से अस्पताल पहुंचने से उनकी जान बच गई। सर्पदंश से ये दो अलग मामले अंधविश्वास और उपचार की उपयोगिता दर्शाते हैं। भदोही के डिप्टी सीएमओ डाॅ. रतीश भुवन पाठक के नेतृत्व में डाॅ. अनुराग डोंडियाल और विकासेंदु अग्रवाल की टीम ने 2023-24 के दौरान सोनभद्र में सर्पदंश से हुई 53 मौतों का विश्लेषण किया। जिसमें उन्होंने पाया कि 60 प्रतिशत पीड़ित अस्पताल जाने से पहले झाड़-फूंक और खुद ही इलाज करने की कोशिश में जान गंवा बैठते हैं।
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राष्ट्रीय रोग नियंत्रण संस्थान के निर्देश पर सर्पदंश से होने वाली मौतों पर किए अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इंडियन स्नेक बाइट रिसर्च कैप एंड एपिडेमियोलाजी में यह बात सामने आई है कि सर्पदंश के बाद अगर समय से उपचार मिले तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। बारिश के सीजन में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। सांपों के ठिकानों पर पानी जमा होने से वह बस्तियों की तरफ आने लगते हैं। जिससे जिले में पिछले एक महीने में 10 से अधिक सर्पदंश की घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें तीन की मौत हो गई, जबकि अन्य का उपचार होने पर जान बच गई।
सर्पदंश के बाद 15-20 मिनट गोल्डेन ऑवर
डिप्टी सीएमओ डॉ. आरबी पाठक ने बताया कि सर्पदंश के बाद 15-20 मिनट गोल्डन ऑवर होता है। इस बीच मरीज को अपने नजदीकी अस्पताल में पहुंचकर एंटी स्नैक वेनम लगवाना चाहिए। सर्पदंश के बाद सबसे जरूरी बात यह होती है कि हमें घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि घबराने से हार्ट बीपी बढ़ती है। इससे हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है। बताया कि मरीज के जिस अंग में सर्प ने काटा है। वहां बहुत हल्का कपड़े से बांध दें। जिससे कि ब्लड का सर्कुलेशन न रूके। जिन्हें सर्प ने काटा है। वे डरें नहीं, क्योंकि जिले में जहरीले सांपों की संख्या काफी कम है। बस समय से उपचार की जरूरत होती है। सर्पदंश से जल्दी मौत नहीं होती, बल्कि लोग घबरा जाते हैं। जिससे हार्ट की समस्या होती है और उनकी जान चली जाती है।
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इलाज में देरी यानी मौत को बुलावा!
डाॅ. रतीश भुवन पाठक ने बताया कि रिसर्च में पाया गया कि 42 प्रतिशत मामलों में घाव के ऊपर कसकर पट्टी (टूर्निकेट) बांधी गई, जबकि 36 प्रतिशत लोगों ने जड़ी-बूटियों का सहारा लिया। इससे इलाज में देरी होती है और जहर का असर बढ़ जाता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 66 प्रतिशत पीड़ित महिलाएं थीं। 47 प्रतिशत घटनाएं घर में हुईं, जबकि 39 प्रतिशत लोगों को सोते समय सांप ने डंसा। 90 प्रतिशत मरीजों में सांस लेने में दिक्कत और लकवे जैसे न्यूरो पैरालाइटिक लक्षण मिले। केवल 11 प्रतिशत पीड़ित समय पर अस्पताल पहुंचे और उनकी जान बच सकी।
26 जुलाई 2026 को पट्टीबेजांव गांव में 12 साल के आकर्ष गौतम को सांप ने काट लिया। परिवार वाले पहले झाड़फूंक कराने में लगे रहे। अस्पताल विलंब से पहुंचने के कारण उसकी मौत हो गई।
दो अगस्त को ऊंज थाना क्षेत्र के सुबासनगर, चक प्रेमगिरि गांव में तीन दिन में मंजू देवी को दो बार सांप ने डंसा, लेकिन दोनों बार सही समय पर उपचार मिलने से उनकी जान बच गई।
सांप डंसने पर मरीज को तुरंत पीएचसी, सीएचसी या जिला अस्पताल ले जाना चाहिए। सभी जगह एंटी वेनम मौजूद है। किसी भी झाड़फूंक के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। अस्पताल पहुंचे तो मरीज की जान बचने का 99 प्रतिशत चांस रहता है। - डॉ. रतीशभुवन पाठक, डिप्टी सीएमओ भदोही।
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