मुंबई पोर्ट पर 250 करोड़ के कालीन डंप
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बंदरगाहों पर कंटेनर की समस्या गहराती जा रही है। यही वजह है कि मुंबई पोर्ट पर भदोही के 250 करोड़ के कालीन डंप पड़े हैं। कंटेनर समस्या के चलते पोर्ट के सभी कंटेनर फ्रेट स्टेशन (सीएफएस) फुल हो चुके हैं। कहा यह जा रहा है कि जितना माल पोर्ट पर है उसका दस गुना तैयार माल भदोही के निर्यातकों के गोदामों में डंप हैं।
इस मौके का फायदा उठाकर वेसल (कंटेनर बुक करने वाले) ऑपरेटर्स कालीन निर्यातकों से तीन से चार गुना तक भाड़ा वसूल रहे हैं। जिन्हें समय से माल आयातक तक पहुंचाना है वे ऊंची कीमत देकर भी माल भेज रहे हैं। कंटेनरों की समस्या कोविड-19 की पहली लहर से इंडस्ट्री के उबरने के बाद मार्च 2020 से शुरू हुई है। फौरी कदम नहीं उठाए जाने से धीरे धीरे यह समस्या गहराती चली गई।
पिछले सात आठ महीनों से हालत यह हो गई है कि जो प्रति कंटेनर माल 3 से 4 हजार डॉलर में जाता था उसके लिए आज नौ से 10 हजार डालर चुकाने के बाद भी वेसल आपरेटर्स निर्यातकों को 30 दिन से डेढ़ महीने तक का इंतजार करा रहे हैं। शिपिंग एजेंटों का कहना है कि हमें जो रेट वेसल ऑपरेटर देते हैं वह हम निर्यातकों को बताते हैं।
निर्यातक से हरी झंडी मिलने के बाद ही कंटेनर बुकिंग के लिए देते हैं। हालांकि मुंहमांगी कीमत देने के बाद भी खाली कंटेनर के लिए निर्यातको को काफी इंतजार करना पड़ रहा है। एकमा के मानद सचिव असलम महबूब ने बताया कि वर्तमान में 250 करोड़ के कालीन पोर्ट पर डंप हैं। इसका दस गुना माल लोगों के गोदामों में पड़ा है। इसमें उच्चाधिकारियों ने रुचि नहीं ली तो कुछ दिन बाद स्थिति और खराब हो जाएगी।