देश के लिए खेलने के सपने की खातिर 175 रुपये दिहाड़ी की मजदूरी की जलालत अब मरहम लगने लगी है। पिता की इच्छा के विपरीत तमाम मुश्किलों को झेलकर मार्शल आर्ट में मुकाम तलाश रहे जिले के इस लाल को एक सैल्यूट तो बनता है। बात हो रही डीघ ब्लॉक क्षेत्र के गोलखरा गांव निवासी आदर्श तिवारी की, जिन्होंने केवल अपने हौसले की बुनियाद पर कामयाबी की बुलंद इमारत का खाका कर जिलेवासियों का सीना फख्र से चौड़ा कर दिया है। लगातार बेहतर प्रदर्शन की बदौलत आदर्श का चयन थाई बॉक्सिंग की अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है। वह 21 और 22 अप्रैल को भूटान की राजधानी थिंपू में होने वाली इंटरनेशनल चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करेगा। प्रतियोगिता के लिए समूचे पूर्वांचल से एकमात्र आदर्श का चयन हुआ है।
जिले के डीघ ब्लॉक के गोलखरा गांव निवासी आदर्श तिवारी मार्शल आर्ट की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2010 से खेलना शुरू कर ताईक्वांडो, थाई बॉक्सिंग और कराते की नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में तीन गोल्ड मेडल जीत चुके आदर्श को खंडवा (मध्य प्रदेश) में गत अक्टूबर-2015 में थाई बॉक्सिंग में गोल्ड जीतने के बाद थिंपू का टिकट मिला है। बकौल आदर्श थिंपू के फूंटशोलिंग में प्रतियोगिता 21 और 22 अप्रैल को होगी। इसके लिए मैं जी-जान से जुटा हूं। उल्लेखनीय है कि आदर्श 58 किलो सीनियर वर्ग में खेलता है। आदर्श ने बताया कि मेरे पिता स्व. डॉ. संतोष तिवारी नहीं चाहते थे कि मैं मार्शल आर्ट में जाऊं। इसके लिए मैं उन्हें बिना बताए कोलकाता चला गया और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेने लगा। इसके लिए पैसे की कमी पड़ी तो 175 रुपये की दिहाड़ी पर ईंट ढुलाई का काम करने लगा। बता दें कि मौजूदा समय में आदर्श पीजी कॉलेज हंडिया से बीए अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं और एक इंटर कॉलेज में छात्रों को मार्शल आर्ट सिखाकर घर का खर्च चलाते हैं। दो वर्ष पूर्व उनके पिता का देहांत हो गया था।
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इनसेट
आदर्श की कुछ प्रमुख उलब्धियां
- ताईक्वांडो की नेशनल ओपन चैंपियनशिप मसूरी-2015 में स्वर्ण पदक।
- कराते में कोलकाता में नेशनल प्रतियोगिता-2013 में स्वर्ण पदक।
- थाई बॉक्सिंग की खंडवा में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।