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मोक्षदायिनी है भागवत कथा : श्रीप्रकाश

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कं​धिया गांव में भागवत कथा कहते कथावाचक श्रीप्रकाश मिश्र। स्रोत आयोजक
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चौरी। क्षेत्र के कंधिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कथाव्यास डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि भागवत कथा मोक्षदायिनी है। भागवत कथा मन की व्यथा मिटाकर धर्म, अर्थ, काम ,मोक्ष चारों पुरुषार्थों को प्रदान कर अनोखी शांति प्रदान करती है। यह कथा प्रेत योनि में गए मनुष्य का उद्धार करती है।
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उन्होंने बताया कि आत्मदेव नामक तपस्वी ब्राह्मण थे, उनकी पत्नी धुंधली बहुत क्रूर थीं। आत्मदेव को कोई संतान नहीं थी। बहुत पूजा करने पर भी कोई संतान नहीं हुई तो आत्महत्या के लिए जंगल में गए। वहां एक महात्मा ने उपदेश दिया कि संतान ही तो पुनर्जन्म का कारण है, लेकिन नही माने तो उन्होंने एक फल देते हुए कहा कि अपनी पत्नी को खिला देना। इससे पुत्ररत्न की प्राप्ति होगी, लेकिन पत्नी कभी झूठ न बोले।
उन्होंने फल लाकर पत्नी को दी। धुंधली ने वह फल अपनी बहन के कहने पर गाय को खिला दिया। उसकी बहन को पुत्र पैदा हुआ तो रात में लाकर धुंधली को दे दिया। धुंधली ने रात में शोर मचाया कि उसे पुत्र पैदा हुआ है। आत्मदेव बहुत प्रसन्न हुए। समय आने पर गाय से एक मनुष्य के आकार का पुत्र पैदा हुआ, उसका कान गाय के समान था। इस दौरान सुभाष मिश्रा, सुरेश मिश्र, रामचंद्र मिश्रा, रविन्द्रनाथ मिश्र, चंद्रशेखर मिश्र, उपेंद्र मिश्र, अखिलेन्द्र सिंह, शैलेन्द्र दूबे आदि मौजूद रहे।
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