25 दिसंबर 2025 को उनकी कार में हेरोइन रखवाकर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को सूचना देकर वाराणसी के मड़ुआडीह के पास गिरफ्तार करवा दिया। इसमें लक्ष्मीशंकर फिर छह महीने जेल में रहे लेकिन निर्दोष साबित हुए। पुलिस ने इन सभी मामलों की गहनता से जांच की तो आरोपित पंकज, सुनील सरोज व प्रिंस गौतम के खिलाफ दर्ज मुकदमे में एनडीपीएस एक्ट की बढ़ोतरी की। उसी तलाश की जा रही थी। तीनों के खिलाफ प्रयागराज, भदोही जिले के कई थाने में मुकदमे दर्ज हैं। उसके खिलाफ 25 हजार का इनाम घोषित किया गया।
कुर्की की नोटिस भी चस्पा की गई। इस दौरान पुलिस को पंकज की लोकेशन जलगांव महाराष्ट्र में मिली। एसपी ने एक टीम महाराष्ट्र भेजी और पंकज को गिरफ्तार कर भदोही लाई। उसे शुक्रवार को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। एसपी ने बताया कि मामले में वांछित तीन अन्य की तलाश के लिए पुलिस टीमें लगी है।
सीडीआर और सीसीटीवी फुटेज से खुली साजिश की परतें
पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने बताया कि लक्ष्मी शंकर उपाध्याय के खिलाफ साजिशकर्ता पहले सफल हो गए। दुष्कर्म और एनडीपीएस एक्ट में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार किया। विवेचना के दौरान सीडीआर और सीसीटीवी फुटेज में साजिश की परत खुलती गई। भाजपा कार्यालय में कार लगवाने के बहाने आरोपियों ने लक्ष्मीशंकर के वाहन में 940 ग्राम हेरोइन को रखवाया था। जिसकी अंतराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब सात करोड़ थी। इस दौरान लक्ष्मी शंकर छह माह तक जेल में रहे। खुद को निर्दोष बताते हुए सुरियावां थाने में प्राथमिकी दर्ज कराया। जिसकी जांच में साजिश सामने आई।
पैतृक भूमि कब्जा करना बना षड्यंत्र की मुख्य वजह
पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने बताया कि केवल शंकर उपाध्याय एवं उनके भाई लक्ष्मी शंकर उपाध्याय की जमीन को पंकज उपाध्याय लेना चाहता था। वह लगातार पैतृक भूमि पर छल कपट कर कब्जा करने एवं वादी परिवार पर दबाव बनाने का प्रयास करता रहा। केवलाशंकर का एक बेटा है जो मानसिक रूप से सही नहीं है जबकि उनके भाई लक्ष्मी शंकर की एक विकलांग पुत्री है। घर पर कोई मजबूत सदस्य नहीं है।