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नए शरीर में आत्मा का प्रवेश पुर्नजन्म

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ज्ञानपुर। मनीषी परिषद की ओर से रविवार को काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के जंतु विज्ञान सभागार में पुनर्जन्म मिथक या यथार्थ पर काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें आए साहित्यकारों ने अपनी राय रखी।
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गोष्ठी का शुभारंभ सरस्वती वंदना से करते हुए मुख्य अतिथि डॉ.रामजी मिश्रा ने कहा कि सनातन धर्म में पुनर्जन्म को शास्त्र सम्मत माना गया है। वेद, पुराण, गीता, रामायण, महाभारत में भी पुनर्जन्म को स्वीकारा है जिससे साबित होता है कि नए शरीर में आत्मा का प्रवेश ही पुनर्जन्म है। .डॉ.भागवताचार्य ने कहा कि आद्य शंकराचार्य में पुनर्जन्म को कर्मानुसार सभी जीव प्राप्त करते हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ.गिरजा शंकर तिवारी ने आस्तिक एवं नास्तिक संप्रदाय की चर्चा कर कहा कि पुनर्जन्म जीव को लेना ही पड़ता है यद्यपि आत्मा अमर है। इसी तरह डॉ. अशोक कुमार मिश्र, डॉ.विद्याशंकर त्रिपाठी, लालमणि उपाध्याय, कैलाशनाथ चौबे, हीरालाल मिश्र, भोलानाथ तिवारी, महेंद्र तिवारी, डॉ.केपी मिश्रा, पारसनाथ मिश्रा, डॉ.कामिनी वर्मा, प्रतिमा शर्मा, उमाशंकर मिश्रा, कन्हैयालाल दुबे, विद्यापति शुक्ला, राधेश्याम तिवारी, डॉ.आरके तिवारी, डॉ.मंजुल आदि ने भी पुनर्जन्म के अवधारणा को सत्य के रूप में स्वीकारते हुए विचार रखा। संचालन डॉ.राजकुमार पाठक ने किया। इस मौके पर परमानंद मालवीय, शिवनरेश मिश्र, जयशंकर पांडेय आदि रहे।
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