भदोही। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. फिरोज को लेकर मचे घमासान के बीच एक मुस्लिम परिवार में मजहबी सौहार्द और लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर दिखी है। नगर के एमए समद इंटर कॉलेज में संस्कृत के लेक्चरर सादिकुल इस्लाम का पूरा परिवार संस्कृत शिक्षण से जुड़ा है। प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त पिता संस्कृत के ही शिक्षक रहे हैं। इसके अलावा उनकी दो बहनें भी संस्कृत की शिक्षिका हैं। पत्नी ने भी संस्कृत में उच्च शिक्षा प्राप्त की है, मगर वह पढ़ाती नहीं हैं। अब उनका 10 वर्षीय बेटा भी संस्कृत पढ़ने की ओर उन्मुख है।
सादिकुल इस्लाम का तो पूरा परिवार ही कहीं न कहीं संस्कृत पढ़ा रहा है। बीएचयू में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर खड़े किए जा रहे सवाल पर हैरानी जताते हुए वह कहते हैं कि ऐसा न तो कभी उनके साथ हुआ ना ही अन्य परिजनों के साथ। फिरोज खान की नियुक्ति पर बात की शुरुआत उन्होंने श्लोक अयं निज: परोवेति गणना लघुचेतसाम। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुंबकम... से शुरू की। कहा यह मेरा है, यह तेरा है। ऐसा छोटी सोच वाले लोग करते हैं। उदार चरित्र वालों का तो सब है। उन्होंने बताया कि आज ये लोग कैसी बात कर रहे हैं, यह समझ से परे है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में पढ़ाई से लेकर आज 15 वर्ष से भदोही में संस्कृत पढ़ा रहा हूं, लेकिन मुझे तो कभी ऐसा नहीं लगा कि मैंने कोई गलती कर दी? कहा कि संस्कृत तो जोड़ने वाली भाषा है। जो लोग संस्कृत को समझते होंगे वे मुझे और प्रो. फिरोज को समझ सकते हैं।
इस्लाम बताते हैं कि उनके पिता मो. इस्लाम, उनकी दो बहनें अफरोज फातिमा और शगुफ्ता इस्लाम के अलावा उन्होंने खुद गोरखपुर विश्वविद्यालय से संस्कृत में एमए, बीएड की डिग्री प्राप्त की है। वह और दोनों बहनें विभिन्न कॉलेजों में संस्कृत पढ़ा रहे हैं। पत्नी निकहत जहां पढ़ाती नहीं हैं, लेकिन उन्होंने भी संस्कृत में एमए, एमएड किया है। सादिकुल के पिता इस्लामिया इंटर कॉलेज फिरोजाबाद से प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एक बहन तो संस्कृत में टॉपर थी, जिसे तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ सम्मानित कर चुके हैं। उन्होंने गर्व से बताया कि उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में उनका बेटा ताबिश इस्लाम अभी कक्षा छह में है, लेकिन उसने भी संस्कृत की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।