ज्ञानपुर। सरकारी धन की किस तरह से बंदरबाट होती है, इसका उदाहरण ज्ञानपुर नगर पंचायत में देखने को मिला है। साल-दर-साल जिस मर्ज की दवा की गई, वह घटने के बजाए बढ़ता जा रहा है। एक करोड़ 42 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी जलनिकासी की समस्या से निजात नहीं मिली तो अब आदर्श नगर पंचायत योजना में मिले बजट का 69 लाख रुपये नाली निर्माण पर ही खर्च करने का ब्लू-प्रिंट तैयार कर लिया गया।
दुर्गागंज त्रिमुहानी के पास बारिश के दिनों में हुए जलभराव को निकालने के नाम पर अब तक डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का खर्च कर दो अलग-अलग नालियों का निर्माण पहले ही कराया जा चुका है, लेकिन कमीशनखोरी और इंजीनियरों की लापरवाही के चलते सारे इंतजाम फेल हो गए। जलनिकासी की समस्या जस की तस रह गई। एक बार फिर सरकारी खजाने को खाली करने में महकमा जुट गया है। आदर्श नगर पंचायत के तहत मिले बजट से नाली निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारी इसके पहले योजनाबद्ध तरीके से नाली का निर्माण क्यों नहीं कराए। यदि नहीं कराए तो अब तक उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। दीवानी न्यायालय परिसर से लेकर जिला पंचायत तक स्थित सभी वार्डों से निकलने वाले गंदे पानी और बारिश के पानी को निकालने के लिए तीन वर्ष पूर्व 87 लाख रुपये खर्च कर नाला निर्माण कराया गया था। इसकी जिम्मेदारी सीएंडडीएस को सौंपी दी गई थी। लेकिन, एक दिन भी जल निकासी नहीं हुई और नाली पूरी तरह ध्वस्त हो गई। जल निकासी व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी। इसके पश्चात नगर पंचायत अध्यक्ष हीरालाल मौर्य के कार्यकाल में ही जिला अस्पताल की बाउंड्री वाल से सटा कर नाले का निर्माण भी कराया गया। इस नाले के निर्माण पर 55 लाख रुपये खर्च किए गए। एक बार फिर नगर प्रशासन आदर्श नगर पंचायत में मिले बजट को पानी में बहाने की तैयारी में है। इसके लिए 69 लाख रुपये का प्रस्ताव भी भेज कर स्वीकृत करा लिया गया। नगर पंचायत में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार को लेकर पूर्व में कई सभासद आवाज उठा चुके हैं, लेकिन आला अफसर ऐसे मामलों को लेकर संजीदा नहीं दिखते। अधिशासी अधिकारी राजेंद्र दूबे ने कहा कि पूर्व में खर्च की जानकारी उन्हें नहीं है। 69 लाख के प्रस्ताव को स्वीकृति मिल चुकी है। निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था के रूप में सीएंडडीएस का चयन शासन स्तर से ही होता है।