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बारिश संकट: 25 फीसदी घटेगी धान की पैदावार

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ज्ञानपुर। बारिश के सीजन में मानसून की बेरुखी ने किसानों संग कृषि विभाग की गणित को बिगाड़ दिया है। बारिश न होने से धान की पैदावार घटना तय हो गया है। कृषि विभाग ने 25 फीसदी पैदावार घटने का अनुमान जताया है। 2018 में एक लाख 30 हजार एमटी पैदावार के सापेक्ष 2019 में 90 हजार एमटी पैदावार का अनुमान जताया है। बारिश भी औसत से करीब 20 से 30 फीसदी कम हुई है।
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देश के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश से जहां बाढ़ के हालात बने हैं, वहीं जिले में बारिश की बूंदे यदा कदा ही नसीब हो पा रही है। जुलाई के शुरूआती दौर को छोड़ दिया जाए तो छिटपुट ही बारिश हो सकी। अगस्त के पहले पखवारे में एकाध दिन की बारिश को छोड़ दिया जाए तो दूसरा पखवारा सूखा रहा। सुबह से लेकर शाम तक तेज धूप और उमस से हर कोई बेहाल हो गया है। जिस समय धान के खेतों में एक फीट तक पानी होना चाहिए, उस समय जमीन फटने लगी है। धूप से धान की फसल मुरझाने लगी है। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 31 अगस्त तक औसतन 788 मिमी बारिश होनी चाहिए, लेकिन जिले में 556 मिमी बारिश हुई, जो 30 फीसदी से भी कम है। जुलाई में 281 मिमीतो जुलाई में 265 मिमी. बारिश हुई। जबकि अगस्त में मात्र 16 मिमी. बारिश रिकॉर्ड की गई। पिछले वर्ष के मुकाबले जून और अगस्त में बारिश कम हुई है। वर्ष 2015 और 2017 की तरह ही मानसून ने इस बार भी धोखा दिया। जिले में 23 हजार हेक्टेअर में धान की रोपाई की गई है जो 2018 से 13 हजार हेक्टेअर कम है। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार प्रजापति ने कहा कि 2018 में 13 लाख कुंतल यानि एक लाख 30 हजार एमटी धान पैदावार की उम्मीद थी जबकि इस साल 90 हजार एमटी पैदावार का अनुमान जताया गया है। जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। किसान भोलानाथ उपाध्याय ने कहा कि बारिश न होना धान की फसल के लिए नुकसान दायक है। फसलों की हालत देखकर दो बीघे धान की सिंचाई नहीं कर रहे हैं।
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