ज्ञानपुर। जिस हो हल्ला के साथ जिले में पौधरोपण अभियान का आगाज किया गया, काश उसी शिद्दत से पौधों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीरता दिखाई जाती तो शायद हरियाली बिखेरने का सपना सच होते देर न लगती। मगर ऐसा नहीं है। अगस्त में वृहद पौधरोपण अभियान के तहत लगाए गए पौधों में से आधे से अधिक पौधे समुचित देखभाल के अभाव में सूख गए। पौधरोपण अभियान में जैसे-तैसे पेड़ों की संख्या गिनाने की फर्ज अदायगी करने के बाद विभिन्न विभाग उनकी देखरेख की जिम्मेदारी से विमुख हो गए हैं।
गत नौ अगस्त को पौधरोपण महाकुंभ के तहत प्रदेश भर में बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए, लेकिन, हरियाली के जरिए पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन की मंशा को भदोही जिले में विभिन्न विभाग कुचल रहे हैं। पौधे तो लगा दिए गए, लेकिन उनकी देखरेख को भगवान भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। लिहाजा कुछ पौधे मवेशियों का ग्रास बन गए तो कुछ अनदेखी के चलते सूख गए। कुल मिला कर 50 फीसदी के आसपास पौधे भी नहीं बचे हैं। पौधरोपण महाकुंभ में भदोही जिले में चुनावी पैटर्न पर 18 लाख 39 हजार पौधे लगाने का दावा किया गया था। ढाई लाख से अधिक पौधे वन विभाग ने लगाए जबकि सबसे ज्यादा लगभग 11 लाख पौधे अकेले ग्राम्य विकास विभाग को लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके लिए बाकायदा जोनल और सेक्टर अधिकारियों की तैनाती कर जगह-जगह पौधे लगवाए गए, लेकिन, पौधरोपण के बाद की हकीकत स्याह है। विभिन्न गांवों से लेकर खेतों की मेड़ों और सरकारी, गैरसरकारी भवनों के परिसर में लगाए गए पौधे तेजी से सूख रहे हैं। गांवों में तालाबों और बाउली के किनारे लगे बड़ी तादाद में पौधे सूख गए हैं।