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उफनाई गंगा की कुपित धाराएं लील रही किसानों की जमीनें

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सीतामढ़ी। खतरे के निशान तक पहुंचने को बेताब गंगा की हुंकार भरतीं धाराएं किसानों की बेशकीमती जमीनें रेतने लगीं हैं। उफनाई गंगा का पानी जहां गांवों की ओर बढ़ने लगा है, वहीं कटान की भेंट चढ़ रही खेती की जमीन हाथ से फिसलते देख किसानों का कलेजा बैठने लगा है। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी स्थित मीटरगेज पर मंगलवार को गंगा का जलस्तर 77.840 पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के अधिकतम जलस्तर से अधिक है। इसके साथ ही कोनिया क्षेत्र के छेछुआ और भुर्रा गांवों में कटान शुरू हो गई।
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उफनाई गंगा ने तटीय इलाके के लोगों की नींद उड़ा दी है। जगह-जगह हो रही बारिश संग टौंस, यमुना आदि नदियों के पानी से गंगा तेजी से बढ़ रही हैं। गंगा ने पिछले वर्ष के अधिकतम जल स्तर 77.800 मीटर के रिकार्ड को तोड़ दिया और मंगलवार को 77.840 मीटर पर पहुंच गई। राहत की बात यह है कि सोमवार को जहां जल स्तर की वृद्धि पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे थी, वहीं मंगलवार को सुबह जल स्तर के बढ़ने के रफ्तार में स्थिरता आ गई। देर शाम तक तीन घंटे में एक सेंटीमीटर की दर से गंगा के जलस्तर में वृद्धि हो रही थी। शाम छह बजे पिछले वर्ष के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए जलस्तर 77.840 मीटर पर पहुंच गया। बाढ़ की दृष्टि से जनपद के अतिसंवेदनशील कोनिया क्षेत्र में गंगा में बाढ़ को लेकर तटीय लोग चौकन्ने हो गए हैं। किसानों की चिंता बढ़ने लगी है कि अगर जल स्तर और अधिक बढ़ा तो किसानों की फसलें डूबने लगेंगी। उधर कटान प्रभावित छेछुआ और भुर्रा गांवों में किसानों की बहुमूल्य कृषि योग्य खेती की जमीनें आंशिक रूप से कटान की भेंट चढ़ने लगी हैं। गंगा की कुपित धारा किसानों की जमीनों को लगातार रेतती जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन स्तर से कटान रोकने के लिए कारगर कदम न उठाए जाने से किसान लाचार हो गए हैं। छेछुआ और भुर्रा के किसानों का कहना है कि उनके दुख दर्द को समझने वाला कोई नहीं है। दोनों गांवों के तमाम किसान भूमिहीन हो चुके हैं, जबकि तमाम बड़े किसान छोटे किसानों की श्रेणी में आ गए हैं। गंगा की धाराओं ने कोनिया के गावों के किसानों की बेचैनी बढ़ा दी है। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी मीटर गेज कार्यालय के अनुसार जल स्तर 77.840 मीटर पार कर चुका है। उड़िया आश्रम के समीप स्थित संस्कृत विद्यालय की चहारदीवारी आधी डूब चुकी है तो गंगा घाट की कई सीढ़ियां भी जल मग्न हो चुकी हैं। इसी तरह गोपीगंज के रामपुर घाट, बेरासपुर, सुजातपुर घाट पर भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। इससे तटवर्ती इलाके के गांवों के लोगों की पेशानी पर बल पड़ता दिख रहा है।
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