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पौधरोपण पर लापरवाही का दंश

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ज्ञानपुर। भले ही जिले में हरियाली का ढोल अफसर पीट रहे हैं। हकीकत यह है कि ज्यादातर पौधे लापरवाही की भेंट चढ़ गए। डीघ के इहटरा और सुजातपुर में सैकड़ों की संख्या में पौधे रखे-रखे ही नष्ट हो गए। यही नहीं कई इलाकों में रोपे गए पौधे संरक्षण न होने से या तो सूूख गए या मवेशी ही उन्हें चट कर दिया। इससे वृहद पौधरोपण अभियान पर सवाल खड़ा हो रहा है।
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पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन की दृष्टि से इस वर्ष शासन की ओर से सूबे में 22 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया। जिले में 17.14 लाख पौधे 15 अगस्त तक लगाए जाने थे। नौ अगस्त को अभियान चला कर जिले में करीब 17.29 लाख पौधे रोपे गए। पानी की कमी और देखरेख न होने से बड़ी संख्या में पौधे सूख गए। विभाग के पास आंकड़ा नहीं है लेकिन अनुमान के मुताबिक एक लाख से अधिक पौधे मौसम और लापरवाही की भेंट चढ़ गए। उदाहरण के तौर पर नये न्यायालय परिसर में करीब 500, सुजातपुर में करीब 500 और इटहरा में करीब 200 पौधे तो बिना रोपे ही सूख गए जबकि सुरियावां, चौरी, औराई, डीघ के कई क्षेत्रों में रोपे गए पौधे संरक्षण के अभाव में या तो सूख गए या मवेशी उन्हें खा गए। जिला प्रशासन और वन विभाग की ऐसी कार्यशैली से सरकारी धन की बर्बादी के साथ ही प्रदूषण से जूझ रहे जिले में हरियाली बढ़ने की उम्मीद भी धूमिल हो रही है। यही स्थिति रही तो बाकी पौधे भी नष्ट हो जाएंगे। सरकार भले ही पर्यावरण सहेजने के लिए गंभीरता दिखा रही हो, लेकिन आम जनता के साथ ही जिला प्रशासन और वन विभाग की लापरवाही भारी पड़ रही है।
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