ज्ञानपुर। जनसुनवाई के मामले में प्रदेश में 34वीं रैंक हासिल करने वाले भदोही जिले के डीएम-एसपी की नैया मातहत ही डुबोने पर उतारू हैं। प्रतिदिन जनसुनवाई में सुबह नौ से 11 बजे तक बैठ कर जनसमस्याएं सुनने के बाद भी जिले में जनसमस्याओं की कोई कमी नहीं है। सैकड़ों शिकायतें अफसरों के टेबल पर डंप पड़ी हैं और वे अपनी ही धुन में मगन हैं। लिहाजा शासन स्तर पर किए गए मूल्यांकन में जिले को सूबे को 34 वीं रैंक मिली।
यूं तो विंध्याचल मंडल के दो अन्य जिले मिर्जापुर और सोनभद्र के मुकाबले भदोही जिले की जनसुनवाई रैंकिंग बेहतर है, लेकिन इसके बाद भी यह रैंक उतनी अच्छी नहीं मानी जा रही है, जितनी होनी चाहिए। दरअसल समाधान दिवस हो या संपूर्ण समाधान दिवस, जनता दर्शन हो या आईजीआरएस से जुड़े मामले, मौके पर निस्तारित न होने वाले प्रकरणों को जब संबंधित अधिकारी को अग्रसारित किया जाता है तो उस अधिकारी की लापरवाही और जांच-पड़ताल को निपटाने में खेल करने वाले मातहतों के कारण समस्या का समुचित समाधान नहीं हो पाता। इससे शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हो पाता और समस्या जस की तस रह जाती है। यहां आला अधिकारियों की चूक यही है कि वे सही मॉनीटरिंग और मातहतों की पेच कसने में ढिलाई कर जाते हैं। इसका खामियाजा प्रदेश स्तर पर जारी जिले की रैंकिंग में डीएम-एसपी को भुगतना पड़ा है। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि जनसुनवाई में प्रतिदिन नौ से 11 बजे तक जनसमस्याएं सुनी जाती हैं। ज्यादातर मामलों में हरसंभव प्रयास किया जाता है कि मौके पर ही समस्या का समाधान कर दिया जाए। जिन मामलों को संबंधित अधिकारियों को हस्तांतरित किया जाता है, उनके निस्तारण में कहीं न कहीं चूक हो रही है। वरना जिले की रैंकिंग और बेहतर होती। इसे दिखवाया जाएगा। लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।