औराई के लक्ष्मणा गांव में नए पंचायत भवन के निर्माण में जिम्मेदारों पर शिकंजा कसने लगा है। संयुक्त सचिव की जांच में राज्य वित्त, मनरेगा के कन्वर्जन से होने वाले निर्माण में डीएम की अनुमति लिए बिना ही काम कराया गया। इसमें फाइलों की जांच किए बिना ही स्वीकृति दी गई। प्रकरण में बीडीओ के स्तर पर घोर लापरवाही सामने आई है। मामले में बीडीओ संग नीचे के अन्य अफसरों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
चौबेपुर गांव निवासी लवकुश चौबे ने 2007-08 में लाखों रुपये खर्च कर बने पंचायत भवन के पुनर्निर्माण पर सवाल उठाते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी से शिकायत की थी। आरोप था कि वर्तमान ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव उसी पंचायत भवन को निष्प्रोज्य दिखाकर लक्ष्मणा गांव में दूसरा पंचायत भवन बनवा दिया। तत्कालीन डीएम आर्यका अखौरी ने मामले में डीपीआरओ, बीडीओ से रिपोर्ट मांगी, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में रहा। जिसको लेकर पीड़ित ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की।
प्रमुख सचिव के निर्देश पर ही संयुक्त सचिव पंचायती राज विभाग धीरेंद्र सिंह और डीपीआरओ राकेश यादव की संयुक्त टीम गत बुधवार को उक्त पंचायत भवन की जांच की। संयुक्त सचिव की जांच में यह बात सामने आई कि 17.78 लाख से बने पंचायत भवन में ढाई लाख राज्य वित्त और 15 लाख से अधिक मनरेगा से खर्च किया गया। दो विभागों के कन्वर्जन से खर्च होने की दशा में डीएम से अनुमति लेेनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया बीडीओ की लापरवाही बताई गई। इसके अलावा संबंधित जेई, एडीओ, सचिव और ग्राम प्रधान भी काम कराने के चक्कर में नियमों को ताक पर रख दिया।
अधिकारियों के लगा रहे चक्कर
वहीं दूसरी ओर गर्दन फंसती देख सचिव, प्रधान संग अन्य अधिकारी माननीयों से लेकर आला अधिकारियों तक अपनी पैरवी कराने में जुट गए हैं। मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि संयुक्त सचिव की जांच में गड़बड़ी सामने आई है। मामले में दोषियों पर कार्रवाई होगी।