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देश की सांस्कृतिक परिवेश को जानेंगे बशीर

Fri, 18 Sep 2015 01:52 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, भदोही
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वे रोजाना लगभग 125 से 150 किमी साइकल चला रहे हैं। 22 जून 2015 को मंगलोर से अपनी साइकल यात्रा का शुभारंभ कर गुरुवार को वे भदोही पहुंचे। यहां उनके क्लासमेट मो.हामिद ने उनका स्वागत किया। उनका मानना है इस साइकल यात्रा से वे अपने मानसिक और शारीरिक शक्ति को परखना तो चाहते ही हैं । साथ ही भारत वर्ष के अलग अलग राज्यों की सांस्कृतिक परिवेश की भी जानकारी हासिल करेंगे।
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निहाद ने गुरुवार को अपने मित्र स्टेशन रोड निवासी हामिद के यहां अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत बहुत भव्य है। यहां अधिसंख्य वेषभूषा के लोग मिलेंगे। सबकी अपनी अलग पहचान है लेकिन राष्ट्रीयता एक है। उन्हीं परंपराओं और भाषा को नजदीक से जानने के लिए वे साइकल से लगभग 8 हजार किमी की यात्रा पर निकले हैं। बताया कि मंगलौर से चल कर वे गोवा, मुंबई, बड़ौदा, गांधीनगर, जोधपुर, पटियाला, नई दिल्ली, आगरा, लखनऊ, इलाहाबाद होते हुए भदोही पहुंचे हैं। बताया कि यहां से शुक्रवार को वाराणसी के लिए प्रस्थान करेंगे जहां से सासाराम, चंपारण, धनबाद, दुर्गापुर होकर पश्चिम बंगाल में साल्ट लेक पहुंचेंगे। इसके बाद विशाखापट्टनम,  हैदराबाद, चेन्नई, बैंगलोर होकर मंगलौर पहुंचेंगे। इसके बाद वे केरल अपने गृहनगर पहुंचेंगे।
इस साइकल दौरे का बखान करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय भले ही अलग अलग धर्म के मानने वाले हो लेकिन इंसानियत सबमें कूट कूट कर भरी है। उन्होंने बताया कि मथुरा में रात 12.30 बजे तक जब उन्हें किसी होटल में जगह नहीं मिली तब एक हिंदू अंजान परिवार ने उन्हें अपने घर मेहमान बनाकर शरण दी। इसी प्रकार बताया कि कहीं लोगों ने अपनी चाय पिलाकर महानता का परिचय दिया तो कहीं लोगों ने खाना खिलाने में खुशी महसूस की। इस यात्रा का एक और मकसद बताते हुए उन्होंने कहा कि वे ला स्टूडेंट्स को भी राह दिखाने का काम कर रहे हैं। बड़े शहरों में ला कालेजों में जाकर ला स्टूडेंट्स के बीच भी समय बिताकर उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं।
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