दो दिनों की हड़ताल के बाद शनिवार से बैंक खुल गए। भीड़ ज्यादा होने से बैंक कर्मचारियों पर दबाव ज्यादा रहा। लोग अपने जरूरत के हिसाब से जमा निकासी किए। दो दिन में लगभग 200 से 250 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ ।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैक यूनियंस के आह्वान पर निजीकरण को लेकर दो दिन जिले के विभिन्न बैंकों की शाखाएं बंद रहीं। हड़ताल के बाद शनिवार को बैंक खुल गए। जिले की कुल 131 बैंक शाखाओं में ताले बंद होने की वजह से एक अनुमान के मुताबिक करीब 250 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। कई जगह एटीएम भी दिन में खाली हो गए थे। ऐसे में ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। बैंक खुलने पर शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों से भारी तादात में पहुंचे ग्राहकों की भीड़ देखकर बैंककर्मियों को फजीहत उठानी पड़ी। बैंक परिसर के बाहर सुबह 10 बजे ही भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी, जो अपराह्न तीन बजे तक जमी रही। इधर, एटीएम पर भी रुपये की निकासी को लेकर खासी भीड़ देखने को मिली। ज्ञात हो, दो राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण के संकेत मिलने पर विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के तत्वाधान में विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने दो दिवसीय हड़ताल की। हड़ताल के दौरान भदोही, ज्ञानपुर, सुरियावां, मोढ़, औराई, बाबू सराय, चौरी, गोपीगंज, लालानगर, ऊज, अभोली आदि जगहों पर स्थित सभी राष्ट्रीकृत बैंकों की शाखाएं बंद रहीं।
एलडीएम अभिषेक कुमार का कहना है कि दो दिवसीय हड़ताल के बाद शनिवार से बैंक अपने निर्धारित समय पर खुल रहे हैं। दो दिन बैंक बंद होने से करीब 250 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ है। बैंक खुलने पर ग्राहकों की भीड़ अधिक रही। इससे कर्मचारियों पर दबाव ज्यादा रहा।