ज्ञानपुर। अपर जिला सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत ने दुष्कर्म के आरोपियों को राहत नहीं दी। उनके जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक गोपीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव की युवती ने आरोप लगाया था कि उसकी मां की दिमागी हालत ठीक नहीं है। उसके पिता शराब पीने के आदी हैं। इसका फायदा उठाकर उसकी बहन को शादी का झांसा देकर शादाब बरगला ले गया। पीड़िता ने कलम बंद बयान में बताया कि आरोपी ने उसे कई शहरों में रखा। उसके साथ दुष्कर्म किया। इससे वह गर्भवती हो गई। इसी दौरान मुंबई स्थित अपने किसी रिश्तेदार से उसे बेचने की बात करने लगा। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि युवती उसकी विवाहिता है और उसने नोटरी के समक्ष शादी भी की है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता प्रवेश तिवारी ने तर्क दिया कि नोटरी पर विवाह की कोई वैल्यू नहीं होती है। मामले में पीड़िता ने यह बताया कि उसको बेचने की साजिश रची जा रही थी। मामला गंभीर है। प्रेम का मतलब यह नहीं होता कि उसकी भावनाओं से खेलते हुए किसी का शारीरिक शोषण किया जाए। न्यायाधीश सुबोध सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। दूसरे मामले में ज्ञानपुर थाना अंतर्गत एक युवती को युवक बहला-फुसलाकर ले गया। इसमें पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। पीड़िता ने कलम बंद बयान में बताया कि आरोपी उसको शादी का झांसा देकर बरगला ले गया। आरोपी ने शादी नहीं की, बल्कि उसका शारीरिक शोषण किया। बयान को बदलने के लिए धमकी दी। न्यायाधीश सुबोध सिंह की अदालत ने आरोपी के अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया। किया।